दिल में है इक सूनापन,आंखों में थोड़ी नमी सी है।
 
तेरे बिना मां मेरी , जिंदगी में  कुछ  कमी सी है ।

दिखे बहुत लोग खूबसूरत,पर कोई तुम सा ना दिखा कोई।
मिले बहुत ख्याल रखने वाले ,पर  तुम सा ना रखा किसी ने।

 तुमसे बढ़कर हम दर्द, इस जहां में कोई नहीं है।
 तेरे आंचल से बढ़कर मां ! जन्नत  नहीं है।

 तेरे बाग के थे फूल हम, अब किसी और बाग के बागवान।
 पर तेरे जैसी बात मां, तेरी वो खूबियां हम में है कहां।

ऐसा नहीं कि मेरी जिंदगी में ,खुशियों की कोई कमी है।
पर मेरे उस घर जैसी बात मां ,मुझे मिलती कहीं नहीं है।

 ममता की छांव तेरी अब भी,विसरी मुझे नहीं है।
  यादों में मेरी मां ! महकती रहती हर  घड़ी  है।

 🌹🌹मेरी यह कविता हर मां को समर्पित,🌹
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                        स्नेह लता पाण्डेय
                            नई दिल्ली