कई कई बार पढ़ती हूं, पलटती हूं, पन्नों को, आंसूओ की बूंदो से, मिट गए से शब्दों को, ये माँ का आखरी ख़त, मुझे उनकी निशानी है,.......
अन्य रचनाएंमेरी इस कविता के माध्यम से मैंने अनुभूत तुम्हारी आवाज़ के स्पर्श को शब्दों में पिरोकर उस अनुभव को व्यक्त करने का प्रयास किया है, जो अपने प्र...
अन्य रचनाएंअभिव्यक्त मौन की परिभाषा मै... अतृप्त स्वप्न सी अभिलाषा मै... मै धरा सी, लिए जीवन का अंकुर मै अम्बर सी विस्तृत निरंतर मै पंछी सी उड़ने को...
अन्य रचनाएंसंस्कृति का उत्थान है, उमंगों का त्यौहार है, डोर संग बंधी पतंग उड़ती है आकाश में, उमंगे हिलोरे खाती है, उल्लास है परवान च...
अन्य रचनाएंस्वर्ण तारों से तौल लिया तूने स्वर्णिम भविष्य मेरा... कैद तो फिर भी कैद है अहा ! समझा ना निर्दयी मन तेरा.... मुझे प्रिय विस्तार गगन का.....
अन्य रचनाएंऔर उस दिन हमारे रास्ते जुदा हो गए. " तुम " जिसके बिना मै अधूरी हूँ | "तुम " जिसके बिना मन की हर बात अधूरी है...
अन्य रचनाएंपरवरिश जो बीजों की इस कदर की होती.... शाखों को फूलों की हिफाज़त सिखाई होती.... तो फूलों को यूँ काँटों के बीच ना रहना होता.....
अन्य रचनाएंअनुभूतियों के पल जब तुम उकेरती हो कागज पर, छू कर उसे साथ हो लेती हूं तुम्हारे, जब शब्दों में पिरो तुम गाती हो...
अन्य रचनाएंलम्हा लम्हा गुजरा आस लगाए बैठे है... दामन में होंगी खुशियाँ.. उम्मीद लगाए बैठे है... चाँद तो चाहा नहीं जो नामुमकिन हो मिलना.. हम तो छत ...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022