वो ज़माने लद गए, जब मानवता ज़िन्दा थी। अब जीते जी इंसान, किसी काम का नहीं।। बैठें हैं कई आदमख़ोर, तस्करी की कश्ती में। बेच खाते है अंगो...
अन्य रचनाएंइंसान के भेश में, हैं ये पिशाच। न करते दया किसी पर, न है करते विश्वास।। देखो ज़रा संभल जाओ, कही हो न तुम्हारे आस पास। पहचान नही सकते ...
अन्य रचनाएंबारिश की वो पहली फुहार, लायी है सावन की बहार। हर कली खिल आई है, डाल डाल मुस्काई है।। बागों में रौनक लाई है, खेतों की फसल लहराई है। ह...
अन्य रचनाएंना रेशम ना सूत, ना जूट की है। रिश्तों की ये डोर, बस वजूद की है।। मेरे होने से, मुझको खोने तक। पहली साँस लेने से, अर्थी को ढोने तक।। ना सोने ...
अन्य रचनाएंधरो धीर, पग पग है तीर, साधो शरीर, ओ अग्निवीर; ओ अग्निवीर, गड़ दे लकीर, दे शंखनाद, शत्रु को चीर; अग्निपथ और अग्निवीर.... माटी से खिल, ...
अन्य रचनाएंनंन्हे पँखो को खोले, हवा का रुख ये बोले; सीख मेरे संग उड़ना, पंजो से धरातल को जकड़ना; भर उड़ान ऊँची, पूरी कर हर रुचि; डाल डाल पत्थर पहाड़, थोड़ा ...
अन्य रचनाएंसड़क सुरक्षा ध्यान रख चलो। यातायात नियमो का पालन करो।। लाल बत्ती न पर करो। पीली पर गति को हल्का करो।। हरी बत्ती पर निकल चलो। सड़क चिह्...
अन्य रचनाएंआलीशान दोगे ज़िन्दगी , तो संघर्ष कैसे जानेगा! ये आज का युवा है, बिना बात एक कंकड़ भी न बिनेगा!! तुम कहते हो दिग्भ्रमित है, कर्तव्यों से पथ भ्र...
अन्य रचनाएंपापा... तुम्हारे जाने के बाद मैंने काफी कुछ सीखा! जिन्हें हम अपना समझते थे, उन्होंने ही पीछे खींचा!! मगर तुम सीखा गए थे हमें, ज़िन्दग...
अन्य रचनाएंइस जग में, मैं पग पग खेला। पर रहा मेले में अकेला।। खूब मिले भटकाने वाले, कोई गुरु तो कोई चेला। मेरा कोई संगी न हुआ, चलता रहा मैं हर ...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022