हर इंसान समझें दूसरों को खिलौना, ज़ब तक जी चाहा खेला, रौंदा, इस्तेमाल किया! ज़ब मन भर आया, जीवन से निकाल दिया, तोड़ा, मरोड़ा, स्वाभि...