आ गया है समय फिर से, अब तू जीत के निकल... कहीं अकेला फँस न जा, इस भिड़ से निकल... आ गया है समय...... ना परवाह कर तू नाकामी की, हौसला ...
अन्य रचनाएंआ गया है समय फिर से, अब तू जीत के निकल... कहीं अकेला फँस न जा, इस भिड़ से निकल... आ गया है समय...... ना परवाह कर तू नाकामी की, हौ...
अन्य रचनाएंतरपैत बिलकैत भूख सँ मुदा, आहार नै हमरा किछु भेटल... सांझ-पराति परितै देरी, पेट तरैप-तरैप कै सेकल... नै जानै कोन जनमक पाप पड़ल थीक, लो...
अन्य रचनाएंतरपैत बिलकैत भूख सँ मुदा, आहार नै हमरा किछु भेटल... सांझ-पराति परितै देरी, पेट तरैप-तरैप कै सेकल... नै जानै कोन जनमक पाप पड़ल थीक...
अन्य रचनाएंतेरे होने से मैं चूक रहा हूँ, आज यह इम्तिहान हमारा है... कभी तकलिफ़ की आहट भी ना मिला, ये रातें भी हमने रोते-रोते गुजारा है... य...
अन्य रचनाएंये मालिक तूम क्यों भेजे हो, तन का भी सेवा ना कर पाऊं... रात्रि मोम से 'लौ' जली है, ना नींद कभी पूरी कर पाऊं... सब कहता ह...
अन्य रचनाएंयह अप्रैल है लथपथ खूनों से, जलियावाला बाग नरसंहार की... एक नहीं हजारों माशुमों की, बलि चढ़ि थी जान की... यह अप्रैल है........
अन्य रचनाएंना जाने किस दिशा में जा रहे हैं, एक उम्मिदें दासतां संजोये हुए... ये कैसी करवट बदल रहा है जिंदगी, सपनों को पिरोये जा रहे हैं... ...
अन्य रचनाएंओ माँ मुझे जोड़ों की भूख लगा है, जरा जल्दी से भोजन लाओ ना... कौआ,तितर,बगरा बनाकर, अपने हाथों से खिलाओ ना... ओ माँ मुझे जोड़ों......
अन्य रचनाएंएक प्यारी सी नन्हीं गौरैया, फुदकती उड़ती अंगराई में... चूंगती दाने झारियों में, बच्चे ले रहीं निंद गहराई में... बच्चे हो या हो प...
अन्य रचनाएंरे मानव तू ना उतना उड़, पंछी न कभी बन पायेगा... जो दो शब्दों को प्रेम बतादे, क्या? ता उम्र दुःख सहन कर पायेगा... रे मानव तू........
अन्य रचनाएंहर एक से उम्मीदें लगाना छोर दिया, सबने आज नाता तोड़ लिया... आज कोई नहीं है अपना कहने को, आख़री साँसों के हवाले छोड़ दिया... हर एक पहलुओं को ...
अन्य रचनाएंउड़ने दो मैं उड़ने आया, अपना पंख फैलाने आया... चट्टानों को पार करूँ मैं, अपना इतिहास बनाने आया... लांध लूंगा ये ज़मी की राहें, ब...
अन्य रचनाएंकुछ के रास्ते आसान होते हैं, कुछ मुश्किल भरे दर्मियां... यूँ समझो सफ़र मुश्किलों से भरे हैं, डटो! बनाओ अपना कारवां... देखना! लौटेंगे तुम्हार...
अन्य रचनाएंरंग-बिरंगी फूलें बागों में, लहलहाती फूलों की गाँव... पीले-निले अतरंगी सी, मँहक उठूँ खुशबू मेंहकाऊँ... रंग-बिरंगी फूलों...... खिल...
अन्य रचनाएंमन अमृत सा बना लिया, तन रोग 'राम' का लगा लिया... उनके आने की आहट से, नैन मोम रुप का बना लिया... 'शबरी' का बाँध ट...
अन्य रचनाएंगुलाब सी मैं एक नाजुक कली हूँ, कहीं टूट ना जाऊँ पंखुरियों की तरह... कभी महकूँ अलबेलों की खूश्बू से, मिल जाऊँ फिर प्यार की रंगों ...
अन्य रचनाएंओ माँ! आज मैं निःशब्द हूँ, तेरी महान उपकार का एक शब्द हूँ... हाँ आज मैं निःशब्द हूँ..... वो यादें अंगुली पकड़कर चलने की, बचपन की...
अन्य रचनाएंना कुछ खोया,तू जाग परिंदे उमर की लेप लगाने दे... खड़ा होकर बैठ भी जा 'क्षणभर', आख़िरी वेद तो गाने दे... ना कुछ खोया...... ...
अन्य रचनाएंहर-एक फौज को नमन करुँ मैं, जय बोलूँ हिंदुस्तान की... आऊँगा फिर याद दिलाने, सोर्य ये बलिदान की...... रात-दिन सैनिक जाग रहे, और हम...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022