रात के लगभग ८ बज चुके थे, ऑटो में बैठी प्रीती के चेहरे पर चिंता और बेचैनी साफ झलक रही थी। शाम ७ बजे की अमृतसर एक्सप्रेस देहरादून...
अन्य रचनाएंतेरी जफ़ाओं को क्यूँ ना, मैं आज हाँ कह दूँ क़ुबूल है मुझे दर्द-ए-जिगर, मैं आज हाँ कह दूँ ✍️ मेरे हौसलों को क्या तोडेंगी ये आँधियाँ टकराना है ...
अन्य रचनाएंतुझमें और मुझमें फ़कत ये फर्क है काफ़ी हम सिर्फ़ शिकायत, तुम रोज़ साजिशें करते हो सुना है आजमाने से भरोसा टूट जाता है हम यकीं हर बार...
अन्य रचनाएंलफ़्ज मिलते ही नहीं कैसे मैं बयाँ करूँ तेरी बेरुखी इस कदर उतरी ज़ेहन में मेरे ✍️ कभी तू सोचना हया की पाकीज़गी को कितनी बेहयाई छुपी ...
अन्य रचनाएं"रोटी, कपड़ा और मकान" एक आदमी की पूरी ज़िंदगी इन तीन चीजों को हासिल करने में निकल जाती है, चाहे वो जरूरत से जुड़ी हो या श...
अन्य रचनाएंस्वेत वर्ण में लिपटी खामोश सी जिंदगी अबला, नारी, स्त्री सदा से ही हाशिये पर क्यूँ है ? अस्तित्व पर इसके होते हैं रोज ही हमले शक्...
अन्य रचनाएंचलो आज दुश्मनों से दोस्ताना कर लेते हैं छोड़ ख़ुशियों की ख्वाहिशें ग़मों से समझौता कर लेते हैं उड़ने दो आज हर आँचल इन हवाओं में आंध...
अन्य रचनाएंउत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में बसा एक छोटा सा गांव गोविंदपुर, गांव की आबादी लगभग २००० -२२०० लोगों के आसपास की होगी। यूँ तो गोव...
अन्य रचनाएंइसमें कोई संदेह नहीं है कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, चाहे वह वानप्रस्थ जीवन जिये या गृहस्थ जीवन जिये। मनुष्य हमेशा समाज में स...
अन्य रचनाएंस्कूल के पहले दिन की स्मृति तो मष्तिष्क पटल पर अब शेष नहीं है लेकिन प्राथमिक विद्यालय के शुरूआती माहौल की कुछ धुँधली सी यादें अभ...
अन्य रचनाएंपण्डित रामप्रसाद खेत के किनारे पड़े हुए छप्पर में बहुत उदास बैठे हुए थे, बुढ़ापे में एक तरह का आघात किसी भी जीवित व्यक्ति को मृत्य...
अन्य रचनाएंतेरे शहर में मुझे मिलती कभी राहत नहीं इतनी मतलबपरस्ती की मुझे आदत नहीं 🌃 छपते हैं रोज अखबार कई ज़ुबानों में छपती है देह यहाँ अब कोई रिवा...
अन्य रचनाएंसुबह नाश्ते की टेबल पर संदीप चौहान ने मोबाइल खोला और अपने बेटे राहुल को व्हाट्सएप चैट पर आया हुआ एक संदेश पढ़कर सुनाने लगे, ...
अन्य रचनाएंभगत सिंह सच में महान एक क्रांतिकारी थे, जिन्होंने अपना सर्वत्र देश सेवा के लिए, देश की आजादी के लिए कुर्बान कर दिया, भगत सिंह जै...
अन्य रचनाएंआज घर के अंदर कमरे के अंधेरे कोने में दुबके बैठे आदित्य सिंह को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। हाथ में पकड़े उस कागज के टुकड़े को ब...
अन्य रचनाएंतेरी एक छवि को जो देखे अति मनमोहक- मनभावन केश खुलें हों तेरे जिस पल आ जाये जैसे फिर से सावन तेरी बिंदिया कुछ कर जाती है ❣️...
अन्य रचनाएंमहेश शर्मा बिजली जाने से उठ के बैठ गए, बाहर बारिश शुरू हो गयी थी, बारिश के साथ-साथ हल्की तेज हवा भी चल रही थी। बेड के पास रखे स...
अन्य रचनाएंखास है तेरी उल्फ़त में लिखा आख़िरी ख़त उस ख़त में तेरी महक अभी भी थोड़ी बाक़ी सी है 🌹 अभी तक गीली है मेरे दिल की जमीं तेरी उल्फ़त की न...
अन्य रचनाएंये घटना उस समय की जब मैं डी.ए.वी. इण्टर कॉलेज में १० वीं का छात्र था, ईश्वर की असीम अनुकम्पा से मैं शुरू से ही बैक बेंचर रहा हूँ...
अन्य रचनाएंवो नृत्य को कई आयाम दे गए इक के स्वप्न के लिये सुबहो शाम दे गए🙏 नृत्य के आनन्द में खोते चले गए अनमोल इक चीज़ को वो बेदाम दे गए🙏...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022