पावन ये घड़ी आई, मंगल की बेला छाई। विवाह है गौरा संग, सभी गण आइए।। धूनी रमी अंग-अंग, छाने लगा प्रेम रंग। रुद्र जाते हैं मगन, नगाड़े बजाइए।। ...
अन्य रचनाएंएक समय था जब विधवा विवाह समाज में मान्य नहीं था। पर जैसे-जैसे साक्षरता बढ़ती गई, समाज सुधारकों ने इस दिशा में एक नई पहल आरंभ की ...
अन्य रचनाएंजब से मिले हम दोनों संग...! आ गया जीने का नया ढंग...! मेरी हर सॉंस में नाम आपका...! प्यार बस मिलता रहे आपका...! कभी रही नहीं बिन आपके...! स...
अन्य रचनाएंना झुको कभी, हौसला रखो अभी, गर, है समय कठिन तो निकल जाएगा वो भी, बढ़ते चलो अपनी मंज़िल पर तुम अभी, प्रयासों से ही बाधाएं पार हो जानी हैं सभी...
अन्य रचनाएंपीली चादर तानें धरती है गदराई, लो कलियों ने फिर ली अंगड़ाई, फूलों ने भी पंखुड़ियॉं चटकाई, सतरंगी बहार चहुॅं ओर है छाई, बौर से लद गई सारी अमर...
अन्य रचनाएंस्व चालित मशीन है जो, कंम्पयूटर से नियंत्रित है जो, मानव द्वारा बनाया गया है जो, यंत्रचालित रोबोट ही तो है वो, मनुष्य नहीं पर दिखता है हू-ब-...
अन्य रचनाएंआओ हम सब मिल भारत देश सजाएं, एक-एक फूल पिरोकर माला एक बनाएं। धर्म अलग हैं, जाति अलग हैं, अलग है वेशभूषा , पर जुड़े हुए हैं एक लड...
अन्य रचनाएंहर घर में जब होगा प्यार जब भाईयों में हो आपसी सौहार्द जब रहें सभी मिलकर एक साथ रुपये-पैसे से ना तौला जाए कोई रिश्ता हर किसी को मिले सम्मान त...
अन्य रचनाएंबहुत पुरानी इक बात सुनी है! दादी नानी के किस्सों में मिलती है, जब भी होती बातें कोई खुफिया, चिल्लाना नहीं, धीरे बोलो, यही कहती गुईंयां, बच्च...
अन्य रचनाएंकभी खट्टी कभी मीठी होती है कहानी हर घर की, तिनका-तिनका जोड़कर, बनाते हैं एक मकान जब भी, परिवार से ही बनता है वो घर तभी, सुबह से लेकर शाम तक....
अन्य रचनाएंगोरी तेरे ये खुले केश, करते हैं घायल मेरे नेत्र, लगती तू हर रूप में सजीली, तेरे रूप पर वारी मैंने खुशी, ये भोला-भाला तेरा मुखड़ा, लगता है म...
अन्य रचनाएंदेखो कैसा ये दौर है आया, मोबाइल, टैब का ज़माना है आया। बचाते थे कल तक जिनको, आज वही सबसे ज्यादा चलाते इसको। ऑनलाइन के दौर में अब...
अन्य रचनाएंशाम ढलने को थी। अभी गर्मी से कुछ राहत मिलने लगी थी, फिर भी लू की गर्माहट महसूस की जा सकती थी, बगीचे के पेड़-पौधे भी दिन भर की लू और तपिश से ...
अन्य रचनाएंविरासत में मिली कला और संस्कृति परंपरा में मिली पूरी परवरिश भी राजाओं, नवाबों के दरबार की शोभा बने पालकियों में बैठने का सम्मान पाते रहे, का...
अन्य रचनाएंसदियों से ये खेल चला आ रहा राज्य को संभालने के लिए राजा का तिलक आवश्यक रहा राज गद्दी पर बैठता वही जिसका राजतिलक होता सही पर इस राजतिलक की ...
अन्य रचनाएंतन हमारा रहे स्वस्थ, समझो इसको जरा सब , पकड़े रहो हरी सब्जियों का साथ, तो यकृत रहेगा हरा-भरा। खाओ चुकुंदर गाजर, तो ऑंखें होंगी ...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022