मैं अपनी जुल्फें छोड़, तेरी जुल्फ़ों को संवारुँ बिन्दी लगाके,तेरी बिन्दी पर ही मरमिट जाऊँ तेरे प्यार में दिल हार जाऊँ,क्या ये गुस्ता...
अन्य रचनाएंमैं अपनी जुल्फें छोड़, तेरी जुल्फ़ों को संवारुँ बिन्दी लगाके,तेरी बिन्दी पर ही मरमिट जाऊँ तेरे प्यार में दिल हार जाऊँ,क्या ये गु...
अन्य रचनाएंकैसी रेलमपेल मची है कैसी धक्कमपेल मची है कोई आगे तो कोई पीछे कोई ऊपर तो कोई नीचे आगे आने की होड़ बड़ी है ना जाने बचपन कब आया थ...
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अन्य रचनाएंउठते बैठते तूने कब कब,कैसे क्या क्या कहा था मुझसे और क्या क्या, कैसे समझाया था, हाँ हर वो पल याद हैं मुझे,कि तूने कब कब मुझे दुला...
अन्य रचनाएंउठते बैठते तूने कब कब,कैसे क्या क्या कहा था मुझसे और क्या क्या, कैसे समझाया था, हाँ हर वो पल याद हैं मुझे,कि तूने कब कब मुझे ...
अन्य रचनाएंकितने प्यार से माँगी थी ना तुमने,अलग होने से पहले पर क्या करता मैं!! मैं जानता था, उस रात बहुत रोई थी तुम, निष्ठुर बन जब तुम्हें...
अन्य रचनाएंकितने प्यार से माँगी थी ना तुमने,अलग होने से पहले पर क्या करता मैं!! मैं जानता था, उस रात बहुत रोई थी तुम, निष्ठुर बन जब तुम...
अन्य रचनाएंजब तक मैं अनमोल था, तू मुझे तौलता था जब तक मैं एक ख्वाब था, तू मुझे सोचता था जब तक मैं ऊँचाईयों पर था, तू मुझे देखता था जब त...
अन्य रचनाएंरेत की मानिंद, फ़िसल रहा है वक्त, कितना भी थामों हाथों से, बस यूँ ही सरक रहा है वक्त, आँखो में ठहरे रहते है ख्वाब, आँधी सा गुजर...
अन्य रचनाएंजनमत एक प्रोडक्ट,दर्शक उपभोक्ता, खुली हुई खिड़कियाँ हैं, दिमाग बंद हैं, जुबान लहक रही है और आँखे तंग हैं, टीवी पर सुंदर सुंदर ...
अन्य रचनाएंअगर शब्दों के पंख होते तो आसमाँ में लिखती रोज एक नयी सी कहानी, अगर शब्दों के पंख होते तो हवा में चमकते, तैरते होते मेरे अल...
अन्य रचनाएंकतरा कतरा जो रगो में बहते थे, जिन्हें हमने रहनुमाँ बन सँवारा था, अपनी रहनुमाई से मुहँ चिढ़ाते हमे आज वही हमारे रहनुमाँ बन बैठे ...
अन्य रचनाएंदुपहरी का जाना,वो शाम का आना शाम का नाश्ता,और वो चाय बनाना, तेरे आने से पहले वो मेरा सँवर जाना उबलती चाय और उसकी खुशबू से वो ...
अन्य रचनाएंअजीब कशमकश है कि लापता भी हुए तो कहाँ हुए... जिंदगी के झुरमुटे में कभी डूब गये तो कभी पार हुए.. ये जिंदगी का भी अजीब फ़लस्...
अन्य रचनाएंमानाकि तुम्हारा अहम् बड़ा था, पर मेरी जिद भी तो कम ना थी, हर बात, जीत हार का प्रश्न क्यों ? सुलह की कोई कोशिश भी ना थी, हम तेरी...
अन्य रचनाएंतू करता रहा कोशिशें मेरे ख्वाबों में बसने की हमें नींद आई ही नहीं,कि करवटे बदलते रहे तू सिखाता रहा ताउम्र, मुझे जिंदगी के सबक ...
अन्य रचनाएंमैं बस एक शरीर नहीं हूँ, मैं यौनसुख की पूर्ति नहीं हूँ, मैं उगते सूरज की लालिमा हूँ, अंधेरे में चमकता हुआ चाँद हूँ, जिस पर तुम ख...
अन्य रचनाएंअब वह खिलखिलाती नहीं है, बस एक तिरछी सी मुस्कान है, अब वह शिकायतें नहीं करती, बिना सिर पैर की,बेमतलब की तुमसे बातें दो चार न...
अन्य रचनाएंखामोश रात का सफ़र क्या पूरा होता है कभी बिस्तर की सिलवटों में शुरू तो होता है, कोई लालसा लेकर आता है तो किसी को रुह की तल...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022