मेरा गांव मुझको, बहुत याद आता , आंखों को दिखता सुहाना सा मंज़र, बैलों की जोड़ी, जब खेतों में जाती, पनघट पर गोरी, जब बातें बनाती, खेतों में फ...
अन्य रचनाएंतुम्हारा ख़त जब मिला मैं देखती रह गई, क्या न आओगे तुम जो ख़त तुमने लिखा? धड़कने मेरे दिल की बढ़ने लगी, क्या लिखा होगा ख़त में, सोचने मैं लगी...
अन्य रचनाएंवह बरसात की, इक काली थी, भीगी सड़क, सुनसान थी, दामिनी, चमक चमक कर, रास्ता दिखा रही थी, बिजली की कड़क, मन में दहशत, भर रही थी, भीगा बदन, कंपक...
अन्य रचनाएंमानव जीवन की मूलभूत महत्वपूर्ण तीन आवश्यकताएं हैं रोटी, कपड़ा और मकान आदि काल से ही मानव अपनी इन तीनों आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हर स...
अन्य रचनाएंमिहिर की नींद आज जल्दी ही खुल गई उसे लगा बाहर बारिश हो रही है कमरे की खिड़कियां बंद थीं इसलिए दिखाई नहीं दे रहा था उसने बगल में सो रही अपन...
अन्य रचनाएंतन कितना भी सुन्दर हो, यदि बुद्धि विवेक का साथ नहीं, तन की सुन्दरता व्यर्थ लगे, जब-तक मन सुन्दर न होगा, तन की सुन्दरता का मोल नहीं, मन निर्म...
अन्य रचनाएंपत्र लिखा एक फौजी ने, अपने घर को भेज दिया, ख़त मिलने से पहले, तिरंगे में लिपटा वह खुद पहुंचा, तिरंगे में लिपटे बेटे को, मां देख रही स्तब्ध...
अन्य रचनाएंहे आदि शक्ति, हे दिव्य पुंज, मैं मौन प्रार्थना करती हूं, मानव,मानव से प्रेम करे, मन की बर्बरता का दमन करो, हृदय प्रेम का मंदिर हो, मन की ईर्...
अन्य रचनाएंआज जब भी मैं काॅफी का प्याला हाथ में लेती हूं। पुरानी यादों के बवंडर घेर लेते हैं, वो कालेज का जमाना याद आता है, एक बार सखियों संग काॅफी पीन...
अन्य रचनाएंउर्मिला का प्रश्न, हे शक्ति पुंज दशरथ नंदन ? उर्मि का बंदन स्वीकार करो , तुम रघुकुल की कीर्ति पताका हो, भातृ प्रेम की परिभाषा, मां के नयनों ...
अन्य रचनाएंतुम्हारा ख़त जब मिला मैं देखती रह गई, क्या न आओगे तुम जो ख़त तुमने लिखा? धड़कने मेरे दिल की बढ़ने लगी, क्या लिखा होगा ख़त में, सोचने मैं लगी...
अन्य रचनाएंपंथ निहारत थक गई अंखियां, आए न सांवरिया, रस्ता देखत बरस बीत गए, न थकीं मोरी अंखियां, सखियां मोहे कहें बावरी, सुन उनकी बतियां मैं मुसकाऊं, मन...
अन्य रचनाएं" मैंने तुमसे क्या कहा था ना, मीरा को बेवकूफ़ बनाकर शीशे में उतारना बहुत आसान है।तुम बेवज़ा डर रही थीं,अब मीरा हमारे बच्चे को पालेगी औ...
अन्य रचनाएंमन के आंगन की दहलीज पार करना औरत के लिए आसान नहीं होती मन की पीड़ा मन में छुपा, झूंठी मुस्कान लिए फिरती हैं, दिल की चुभन हर पल दर्द देती ...
अन्य रचनाएं" यह सिलसिला रोज का होने लगा है कोई एक दिन की बात नहीं है अब तुम हर रात शराब के नशे में घर आते हो अब मैं और बर्दाश्त नह...
अन्य रचनाएंमुझे याद आई आज बचपन की रातें, दादी की लोरी नानी के किस्से, रातों में सुनते थे गोदी में छुप के, नानी सुनाती थी जब भी कहानी, कहानी में होती थी...
अन्य रचनाएं" गार्गी बहू!!! मुझे लगता है कि इस घर में सब पागल हो गए हैं, पार्वती भाभी पागलपन की हरकत कर रही हैं पर तुम्हें क्या हो गया है जो तुम...
अन्य रचनाएं" क्या हुआ भाभी आप इतनी परेशान क्यों हैं"? लक्ष्मी ने पार्वती जी से पूछा पर उनके मन में भी यह विचार बार-बार उठ रहे थे कि...
अन्य रचनाएं" या खुदा तुमने यह कैसा मंज़र दिखाया है, अब तक तो हुस्न के कदमों में, इश्क़ ने अपना सिर झुकाया है, पर यहां तो नज़ारा ही कुछ और है, ह...
अन्य रचनाएं" पिताजी आप अचानक यहां सब कुशल तो है आपकी तो तबीयत ख़राब थी इसलिए आप शादी में नहीं आए थे अब तबीयत कैसी है आपकी"? पार्वती ने घबराते...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022