कभी धूप सी जलन देती है तो कभी छांव बन जाती है कभी दोस्त बन जाती है तेरे प्रेम की निशानी । सहलाती है बालों को आंसू भरे गालों को उन ...
अन्य रचनाएंकभी धूप सी जलन देती है तो कभी छांव बन जाती है कभी दोस्त बन जाती है तेरे प्रेम की निशानी । सहलाती है बालों को आंसू भरे गालों को ...
अन्य रचनाएंपतिदेव सेंकते रोटी , पत्नी आराम फरमा रही हैं सच कहते हैं सब लोग अब जमाना बदल रहा है जूठे बर्तनों का अंबार सा लगा हुआ है किचेन म...
अन्य रचनाएंहंसी की छोटी सी किरन आ गईं अंधेरे में मुस्कान भी पलट कर मिलने चली आई उदासी ने छुट्टी की दरख्वास्त दे दी तब खुशी ने दिल में नई जग...
अन्य रचनाएंउलझनों के धागे में पिरोकर धीरे धीरे बढ़ रही थी जिंदगी थे कितने अनसुलझे सवाल जिनका जवाब वो नहीं जानती ऋद्धि अंजान नंबर के उस गु...
अन्य रचनाएंकितना दर्द छिपा है तेरी मुस्कुराहट के पीछे कितने जख्म हैं तेरे नाज़ुक हृदय के अंदर इतना धैर्य है तेरी शख्सियत में क्यों स्त्री...
अन्य रचनाएंक्यों पुती हुई है तेरे चेहरे पर अंजाने डर की नीली स्याही क्यों खौफ खाती है इतना क्यों हंसने की है तुझे मनाही ऋद्धि का चेहरा अच्य...
अन्य रचनाएंबारिश तू मेरी दोस्त है ना फिर क्यों नहीं पास आती है तू आकर फिर से गले लगा ले मुझे दूर से ही क्यों मुस्कुराती है तू ऋद्धि अपने अत...
अन्य रचनाएंआज फिर वैसी ही तेज बारिश हो रही थी, ऋद्धि अपने कमरे की खिड़की से बारिश में भीगते हुए लॉन में लगे हुए बेला, गुलाब,मोगरा, हरसिंग...
अन्य रचनाएंशिक्षा व्यवसाय या कर्तव्य??? कौन निश्चित करेगा यह ? अभिभावकों के ऊपर बढ़ता मंहगी फीस का दुगुना बोझ या इस शत्रु कोरोना की मार ...
अन्य रचनाएंनदी के किनारे बने एक छोटे से गांव में बूढ़े बरगद और घने पीपल की छांव में कच्ची सड़क के पास बनी हुई बस्ती में अपनेपन की सौंधी महक...
अन्य रचनाएंवो अमर हो जाते हैं हमारे दिलों में रहते हैं लाख कष्ट जो सहते हैं वो शहीद ही होते हैं वतन के वास्ते समर्पित होता है तन मन धन खुद ...
अन्य रचनाएंशहीदों का एक दिवस नहीं संपूर्ण संसार शहीदों का है अपनी मातृभूमि की रक्षा में पूरा बलिदान शहीदों का है हम एक दिवस क्यो मनाए ज...
अन्य रचनाएंसर्वधर्म सम्मेलनं एकैव रज्जु योजकं बन्धुत्व भावना अहे वसुधैव कुटुंबकम् भारतस्य एकता जनाः च अखंडता मनसे मित्र भावना विच्छिन्न द्...
अन्य रचनाएंहंसते चेहरे के पीछे कितना छिपा है दर्द मत पूछिए आंखों से बहते अश्कों में झांकते हुए फर्ज़ मत पूछिए मेहनत से बने उस घर की तारीफ़...
अन्य रचनाएंहां ... दीवारें भी सुनती है छुप छुप कर दूसरों की बातें कब? जब खड़ी हो जाती है दो लोगों के बीच नफ़रत और वैमनस्य की दीवार स्नेह ...
अन्य रचनाएंमत कहो कि अब मुलाकात आखिरी है अभी तो इस सफर की शुरुआत बाकी है कुछ कांटों से घबरा कर राह क्यों छोड़ें अभी तो सफलता की सौगात बाक...
अन्य रचनाएंमहबूब वतन तुझ पर हर शख्स की जान कुर्बान है सेना है तेरी शक्ति और हम सब का वो अभिमान है कितनी भी मुश्किलें मिले कितनी भी बाधाए...
अन्य रचनाएंकुहासे की रात में छिपे हैं कई रहस्य ना जाने कितने गुनाहों का गवाह है ये कभी छुपा लेती है वो लुटती अस्मत ये घनघोर कुहासे भरी मन...
अन्य रचनाएंमुख्य भूमिका - खंडोंजी नैवेशी पटेल - सावित्री बाई फुले के पिता लक्ष्मी बाई - सावित्री बाई फुले की माता सावित्री बाई फुले - स्...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022