यह काशी बड़ी निराली हैं सब शहरों से मतवाली हैं कहीं पान की गहरी लाली हैं तो मित्र अर्जुन और आली हैं जहां गलियां भी खूबसरत हैं बसा महादेव का ...
अन्य रचनाएंलौट चले हम उन अंधेरे गलियारों में जहां सपनों का दीपक तुमने जलाया था मेरी खामियों को नज़रंदाज़ कर मुझे मेरी तरह अपनाया था। लौट च...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022