जंगल के इस हिस्से में पिशाचों की बस्ती बनी हुई थी। अनेकों पीपल और बरगद के पेड़ थे। जिनपर पिशाच रहते थे। रोटी, कपड़ा और मकान मनुष्यों के सा...
अन्य रचनाएंडाक्टरी की पढाई पूरी करके रोशनी की नौकरी एक बहुत अच्छे अस्पताल में लग गयी। न जाने कितने साल पढाई में लङकी ने खपा दिये। पहले एम ब...
अन्य रचनाएंदिन पर दिन गुजरते गये। घर में दया मात्र एक कमरे में सिमट गयी। बार बार अपनी ही गलती सुनते सुनते वह खुद को गलत भी मानने लगी। हाॅ... ।सच में ...
अन्य रचनाएंयदि किसी नजदीकी की मृत्यु जीवन का एक बड़ा दुख है तो मोहन न तो सौम्या के मन के नजदीक था और न हीं दया के मन के। कितने आश्चर्य की बात कि इसी ...
अन्य रचनाएंवासना में अंधे बने को जीवन में सुख कब मिलता है। आत्मबोध और मन की धिक्कार भले ही सचेत व्यक्ति के लक्षण हैं। कामी का मन कभी भी उसे उसके कृत्...
अन्य रचनाएंवासना में अंधे बने को जीवन में सुख कब मिलता है। आत्मबोध और मन की धिक्कार भले ही सचेत व्यक्ति के लक्षण हैं। कामी का मन कभी भी उसे उसके कृत्...
अन्य रचनाएंकभी माॅ को रंगीन वस्त्र धारण करता देख दोनों हाथों से ताली बजा रही छोटी सी बालिका शुचि पंद्रह साल की हो गयी। खुद पढाई से दूर भागने बाली दया...
अन्य रचनाएंकभी माॅ को रंगीन वस्त्र धारण करता देख दोनों हाथों से ताली बजा रही छोटी सी बालिका शुचि पंद्रह साल की हो गयी। खुद पढाई से दूर भागने बाली दया...
अन्य रचनाएंपंचायत के फैसले से केवल दया ही दुखी नहीं थी, अपितु इस फैसले को सुन सौम्या भी बहुत ज्यादा व्यथित हो गयी। वह समझ नहीं पा रही थी कि इस तरह कु...
अन्य रचनाएंपंचायत के फैसले से केवल दया ही दुखी नहीं थी, अपितु इस फैसले को सुन सौम्या भी बहुत ज्यादा व्यथित हो गयी। वह समझ नहीं पा रही थी कि इस तरह कु...
अन्य रचनाएं" नहीं माॅ। ऐसा निर्णय क्यों। मेरे हित चाहते चाहते मेरे ही हित की अवहेलना क्यों। इसकी तुलना में तो अच्छा रहता कि पंचायत ही न बुलाई जा...
अन्य रचनाएं" नहीं माॅ। ऐसा निर्णय क्यों। मेरे हित चाहते चाहते मेरे ही हित की अवहेलना क्यों। इसकी तुलना में तो अच्छा रहता कि पंचायत ही न बुलाई जा...
अन्य रचनाएंपंचायत में कभी कालीचरण का पलड़ा भारी रहा तो कभी सैरावत के पक्ष में माहौल गया। दोनों ने ही भावनाओं का खुलकर प्रयोग किया। कालीचरण के लिये दय...
अन्य रचनाएंपंचायत में कभी कालीचरण का पलड़ा भारी रहा तो कभी सैरावत के पक्ष में माहौल गया। दोनों ने ही भावनाओं का खुलकर प्रयोग किया। कालीचरण के लिये दय...
अन्य रचनाएंकालीचरण ने बहुत से रिश्तेदार इकट्ठे कर लिये। सैरावत के घर पंचायत बैठी थी। ऐसी पंचायतों में कुछ को अपना रौब दिखाने का, समाज में अग्रणी बनने...
अन्य रचनाएंकालीचरण ने बहुत से रिश्तेदार इकट्ठे कर लिये। सैरावत के घर पंचायत बैठी थी। ऐसी पंचायतों में कुछ को अपना रौब दिखाने का, समाज में अग्रणी बनने...
अन्य रचनाएंसमय कितनी जल्दी बदल जाता है। मनुष्य का व्यवहार भी कभी कभी इतनी शीघ्र बदलता है कि यकीन करना भी कठिन होता है कि यह वही व्यक्ति है जिसके मन म...
अन्य रचनाएंसमय कितनी जल्दी बदल जाता है। मनुष्य का व्यवहार भी कभी कभी इतनी शीघ्र बदलता है कि यकीन करना भी कठिन होता है कि यह वही व्यक्ति है जिसके मन म...
अन्य रचनाएंरात के लगभग नौ बज रहे थे। जुगनू साइकिल से फैक्ट्री के लिये निकला पर फैक्ट्री पहुंचा नहीं। एक दिन पूर्व ही पगार मिली थी। किसी तरह उधार देन...
अन्य रचनाएंरात के लगभग नौ बज रहे थे। जुगनू साइकिल से फैक्ट्री के लिये निकला पर फैक्ट्री पहुंचा नहीं। एक दिन पूर्व ही पगार मिली थी। किसी तरह उधार देन...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022