न्याय है कहाँ।जिस तरह से हमारे देश मे एक के बाद एक बेटियो पर जुल्म हो रहे है । उनकी सुरक्षा पर प्रश्न उठ रहे हैं।हम यह सोचने पर विवश...
अन्य रचनाएंबारिश की बूंदे धरती को नहला रहीं प्यासी है धरा उसकी प्यास बुझा रहीं नन्हीं नन्हीं बूंदे कर रहीं अटखेलियां पत्तों पर ठहर कर मोती की म...
अन्य रचनाएंकैसी विडंबना है ये, क्या हालात हो गए? घर के ही चिराग ही अपने घर को जला रहे भटक गए हैं राह भ्रमित हो गए हैं अपना भला बुरा नहीं पह...
अन्य रचनाएंसुनकर अपने मन की पंख फैलाकर उड़ना है खुले आसमान मे ऊंची उड़ान भरना है परिन्दे को उड़ता देख मन भी चंचल हो गया पर मेरे भी कब खुले आसमान ...
अन्य रचनाएंग्रहों के चक्कर में जो उलझ गयाb भूल गया राह अपनी मार्ग भटक गया नहीं बक्शा सत्यवादी राजा हरीश चंद्र कोभी खुद ही सरे राह बिकवा कर दान...
अन्य रचनाएंइक छोटी सी आशा जब दिल में जाग जाती उसी के सहारे जीवन नैया पार लग जाती थाम कर दामन इसका कुछ कर गुजरने की होती चाह मन में यही तो जीने...
अन्य रचनाएंये चौदहवीं का चांद भी है आफताफ की तरह बहुत अजीज है सबका दिल के बहुत करीब है ना सर पर इसके घूंघट है ना चेहरा ढका है बुर्के से कभी ईद...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022