छा गयीं काली घटायें,बादल दुखों के छाये, माथे पर जो आयीं उनके, चिंता की रेखायें, अचानक से, लाकडाउन जो आया, प...
अन्य रचनाएंनारी देखो अब, मौज मनाती, पतिदेव से सब, काम करवाती, नारी देखो अब..... खुद पलंग पर, आराम फ़रमाती, ऐ जी सुन लो अब, तुम मेरी बात, अब...
अन्य रचनाएंहमारी संस्कृति, का प्रतीक, पुरातन से चली, आ रही साड़ी, साड़ी ही पहनती, नारी जब, ब्याह कर, आ जाती ससुराल, पल्लू सीधा लिया, या उल्...
अन्य रचनाएंतर्ज:- मुबारक हो सबको समां ये सुहाना.... मुबारक हो मैया, ये तुमको नौ रात्रि, मैया आ जाना, आ जाना,आ जाना, मैया जी के माथे पे, बिं...
अन्य रचनाएंआधुनिका नारी हूँ मैं, आत्मनिर्भरा हूँ मैं, बाजुओं में दम है मेरे, अबला नहीं हूँ मैं, आधुनिका नारी हूँ मैं , आत्मनिर्भरा ह...
अन्य रचनाएंयार, दोस्त, मित्र, सखि, सहेली, जो भी कह लो, दोस्त!! होता तो है कुछ खास, संजीदगी में भी जो, चेहरे पर ला दे म...
अन्य रचनाएंभाग्य ने अपना, रंग जमाया, रोके से रुके न, ये समय का पहिया, राजा से रंक बनाया इसने, रोते को हंसाया, मुर्दे में जान फूंकी, राम जै...
अन्य रचनाएंमनहरण घनाक्षरी छंद विधान- 8,8,8,7 कमल विराजती माँ, सरस्वती वंदनि हो, शीष मुकुट मणि माँ, कष्ट निवारिणि हो, ज्ञान प्रकाश देती माँ, दुख...
अन्य रचनाएंआ रही, ठंडी ठंडी मस्त, पवन पुरवाई, बसंत ऋतु, आने वाली है, आ रही ठंडी ठंडी..... अब हो रही, शीत मदमस्त, आली पवन पुरवाई, आने वा...
अन्य रचनाएं"26जनवरी गणतंत्र दिवस" जय हो गणतंत्र दिवस, जय हो हिन्दुस्तान की, आज के दिन, संविधान रचा गया, आज का दिन, बे...
अन्य रचनाएंबिंदिया री बिंदिया, रंग-बिरंगी अनोखी बिंदिया, शीर्ष पे चुनरी साजे, भाल पे साजे बिंदिया, माथन को है श्रंगार, चमक दमकती बिंदिया, ब...
अन्य रचनाएंअंतस में उठते, भीगे से, सतरंगी सपने, भीगी पलकें, लग रहा है, आसमां से, उतर आयेगा, धरा पर, ज्यौं धनुष सतर...
अन्य रचनाएंसबसे प्यारा, सबसे न्यारा , भारत देश है हमारा, एक देश है, एक गरिमा इसकी, धर्मनिरपेक्ष है, पहचान इसकी, भाई चारा की है, अजब मिसाल,...
अन्य रचनाएंनमन करें, कोटि कोटि उनको, जयंती है, विवेका नंद जी की, ज्ञान का दर्पण, उनका जीवन, विश्व भर में दी, पहचान देश को,...
अन्य रचनाएंकौनऊ खेत, कौनऊ खलियान, कृषक जीवन की, आये दासतां, जीवन है, कृषकाय ओको, विचरत रहत, दिन रात, टूटी सी एक, खटैया मचैया, परी रहत,...
अन्य रचनाएंकोई माने या न माने, मेरी झोली भरदी माँ ने, मेरी विनती करी कबूल, मैं दौड़ी दौड़ी लाऊँ, शिव चरणों की धूल, कोई माने या न माने........
अन्य रचनाएंअलविदा वर्ष 2021 के साथ कुछ अच्छी तो कुछ बुरी यादें भी जुड़ी हैं.... वर्ष 2020 का बीजा रोपड़ कोरोना ने जिस तरह शुरुआत ही ...
अन्य रचनाएंजरा गौर फ़रमायें, इधर भी, अख़बार की सुर्खियों में:-- नेताओं की हर खबर, अखबार की सुर्खियों में, याद न आते कभी वो दिन, ...
अन्य रचनाएंमुझे आज मुक्ति मिली, रुक गयीं सांसे मेरी, ख़त्म हुंई झंझटे सारी, उड़ चला मैं, उन्मुक्त नीले आकाश में, हो गयीं पूरी अब सारी, जिम...
अन्य रचनाएंगली के आखिरी मोड़ पर, अन्दर की तरफ, रहता था, वो चाय वाला.....रोज सबेरे - सबेरे उसका ठेला चाय बनाने के सामान से सजाकर, निकल जाता थ...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022