कभी दबा दी जाती है, कभी छिपाई जाती है। संसद में मुद्दों पर बहस, आवाज उठाई जाती है।। कभी बुलंद होती यही कलम जन-जन की बनती आवाज...
अन्य रचनाएंआग का दरिया बचो लत बूरी इंसा बचो सिंधु यह दुख भरा डूब मत जाइये व्याधि मूल मानो इसे भारी भूल जानो इसे अवगुण की खान को मन से हट...
अन्य रचनाएंसन सन करती लूऐ चलती आसमां से अंगारे। चिलचिलाती दोपहरी में बेहाल हुए पंछी सारे। आग उगलती सड़कें चौड़ी नभ से ज्वाला बरसे। बहे प...
अन्य रचनाएंममता की मूरत मां होती खूबसूरत मां आंचल की छांव तेरी हर बला टालती करती खूब प्यार मां मधुरम दुलार मां ममता के मोती सारे मुझ पर वा...
अन्य रचनाएंगली-गली घुमा करता ले हाथों में इकतारा। सात सुरों के तार जोड़ संगीत सुनाता प्यारा। शब्द शब्द मोती से झरते बहती जब रसधारा महफिल ...
अन्य रचनाएंकंप्यूटर क्या कहर ढा रहा मोबाइल मुस्काता है। अलमारी में पड़ी किताबों को बहुत धमकाता है। इतने सारे चैनल हुये पाठक सारे दर्शक हो गए। टीवी पर...
अन्य रचनाएंमुश्किल से टकराता है मेहनत को वो अपनाता है गरम तवे की रोटी खातिर परदेस तलक वो जाता है हाथों का हुनर रखता है वो महल अटारी करने को खून पस...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022