झूम उठा फिर आज मेरा दिल, झूम के गाने लगा। देखके इसको मेरा गम, चुपके से भाग जाने लगा। मैं पागल था, बेचने खुद को खड़ा एक बाजार में।...
अन्य रचनाएंशहर, देश या दुनिया, हर जगह खेले शतरंज। दिमाग वालों के बीच ही देखने मिले शतरंज। कदम भरना फूंक फूंक के, खेल बड़ा ही चतुर। चाल एक ज...
अन्य रचनाएंबचपनमें जब आंसू आये माँ याद आ जाये। आज जब माँ याद आ जाये आंसू ला जाये। दिल जलता है रात दिन, बताओ क्या करें? आज भी माँ ज़िंदा है, ...
अन्य रचनाएंनारी तुझ पर दिन भी एक आये। फिरभी निष्ठुर मर्द तुझे ठुकराये। नारी बिना जीवन अधूरा, सच है। यह सब लेख पत्रिकाओं में आये। नारी तो ना...
अन्य रचनाएंहर सुबह की शाम होगी, सुबह से पहले रात होगी। कोई रुका है ना ही रुकेगा, अपनी ही सब बात होगी। खामोश जहाँ, खामोश ज़ुबाँ, ख़ामोशी है चा...
अन्य रचनाएंहवाओं से पूछे हो उसके ठिकाने, कैसे नादान हो। समंदर की मौजों को चले नहलाने, कैसे नादान हो। एक इन्सां को तो समझा न सके तुम इस जहाँ...
अन्य रचनाएंखबरों को जनता तक पहुंचाये वो अखबार। रोज़ की बातें कागज पर छापे वो अखबार। राह चलते फेरिये बूम लगाये, बेचते सबको। सब के अपने शोख, ज...
अन्य रचनाएंहर किसीका मन लुभाता मेला। बच्चों को तो खूब भाता मेला। कोई हँसता कोई रोता है मेले में। अच्छों का भी मन भटकाता मेला। मिलना बिछड़ना ...
अन्य रचनाएंकितना आसन है, किसी को पसन्द आ जाना। बिना किसी झिझक, ज़रा खुद को झुका जाना। नज़र को नज़र से मिला कर बात करना ही सही। गर नज़रें ना मि...
अन्य रचनाएंसुनने में आया है कि वो हम से जलते है। चलो इसी बहाने हमें याद तो किया करते है। हम तो दिल बड़ा लिये ही घूमते रहते है। वो है बदनाम क...
अन्य रचनाएंसपनों की राहें, व अंजान मंज़िल। कोई न मिलता, कुछ भी न हांसिल। नाकाम कोशिश में फसने से पहले। समंदर में नैया, मिलता न साहिल। हिम्मत...
अन्य रचनाएंवो बारिश का मीठा पानी, वो पानी की बुँदे। जीवन सारे जहाँ के बचाती, वो पानी की बुँदे। सागर इतना भरा हुवा, ना पीने के काम आये। कारी...
अन्य रचनाएंगुलाबों की महक, सूरज की रौशनी। चुराये नहीं घटती, छुपाये नही छिपती। दूरियां दोस्तों से हो कोई ग़म नही हमे। दिल से यादें उनकी भुलाय...
अन्य रचनाएंयादों के हर समंदर में दो तरहा की लहर उठती है। कुछ प्यास बुझा देती है, तो कुछ प्यास बढ़ा देती है। कुछ ऐसे बहाव आते हैं, दिल बाग़ ब...
अन्य रचनाएंकितनी सुहानी प्यारी लगती बर्फ की बारिश। बेहद ठंडा एहसास दिलाती बर्फ की बारिश। आसमान भी धुंधला, कोई न दिखे बाहर। एक सफेद चादर बिछ...
अन्य रचनाएंकितने लोग खा खा के मरे। कितने तो फिर पी पी के मरे। कुछ तो कमा कमा के मरे। कहो ज़रा कितने जी जी के मरे। आये दुनिया में जीवन लेकर। ...
अन्य रचनाएंसपनों की मंज़िल आभासी होती है। ढूंढो मत, भूलना समझदारी होती है। ख्वाब रात का हों या हो सुबह का। उसमें कभी भी सच्चाई नही होती है।...
अन्य रचनाएंगरीब भूख से मर जाता, कलाकार बनाते पेंटिंग। निवाला देने कोई न आता लाखों में बिकते पेंटिंग। लगाते कमरों की दीवारों पर गरीबी वाले प...
अन्य रचनाएंजीवन से पहले हो या फिर मौत के बाद। ना होता तू जहाँ में, ना होता कोई आबाद। पहले ना होना यहाँ कैसे कहे कोई बात। ना ही दिन था देखा...
अन्य रचनाएंबचपन उधार दे दो। सबकुछ ले कर दे दो। याद आ रहा अभी। नज़ारे, वो नज़र दे दो। बड़े बनने की उम्मीद। दरगुज़र कर के दे दो। जो मज़ा था उन दिन...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022