फिरोज़ दहिवाला लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैंसभी दिखाएं
दिल झूम के गाने लगा।
शतरंज.....चतुर खेल
माँ याद आ जाये
नारी सच में नारी कहलाये
हर सुबह की शाम होगी
कैसे नादान हो
अखबार...आज की क्या खबर है?
मेला....चलता रहे
पसन्द आ जाना
हम से जलते है
अंजान मंज़िल
वो पानी की बूंदें....जीवन हमारा
गुलाबों की महक
यादों का समंदर
बर्फ की बारिश...अनोखा एहसास
कितने लोग खा खा के मरे
सपनों की मंज़िल
वो पेंटिंग.....जो नाम रोशन कर दे
एक सन्नाटा.
बचपन उधार दे दो।
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