इस जिंदगी की ,एक ही परिभाषा है, कभी धूप , कभी छाँव ,कभी आशा है, रुकना मंजूर नहीं, इसे चलना दूर नहीं, किसी के बंदिशों में, कभी मजबूर...
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अन्य रचनाएंनजर न लड़ती ,क्या करूँ, रात न कटती, क्या करूँ, जुदा होकर तुम्हीं बताओ, किसकी चलती,क्या करूँ, नज़्म , शेर और गज़लें मेरी, तुम पर खुलती, क्या क...
अन्य रचनाएंहै स्वेद जल से जो विभूषित, इस धरा का जो मान है, सत्य की जीवन कला है, और धरा का जो ज्ञान है, कटु वचन की है जिसकी व्यथा, घात प्रतिघात की जिसकी...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022