गुबार उठ चला, चराग़ बुझ चला गरजी तोपें तो आसमान हुआ पहले लाल, फिर काला, फिर जाने किस- किसका वजूद मिट चला, झुलसे, जले, हुए कोय...
अन्य रचनाएंसुनो जरा, वह कह रहा है..... खर्च जोड़ने,बीमार माँ,उपचार भी नहीं लेती, तब कहीं जा बेटा उसका पढ़ रहा है सुनो जरा, वह कह रहा है ...
अन्य रचनाएंआदरणीय लोक गायिका जी, आपने जब कभी"का बा" गाया, अनायास ही मुझे वर्षा कालीन असंख्य पीले टर्राते हुए उन मेंढकों का स्मरण हो...
अन्य रचनाएंहर पल मीठा हो जीवन में इतना, खीर जैसे गन्ने के रस की, बधाई नव वर्ष की लहलहाये सदा मुस्कान की खेती, बातों में हो खुशबु सी खस की, बधाई आन...
अन्य रचनाएंसुंदर सुसज्जित प्रकृति सा आंगन, नन्ही संध्या - दीप मैं नेह बिन बुझती सी बाती, कैसे कुछ रचना रचे? है असीमित गगन आगे,पृष्ठ केबल क्षितिज कोर ...
अन्य रचनाएंघिर चला यूँ घोर तम, डूबा सा विश्व अधमतम हे ज्योतिर्मय ,लो अवतार पुनः हो प्रकाश- पुंज l है पथ भ्रमित मानव , पथ न सूझे न पथ-...
अन्य रचनाएंसर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया.........की अवधारणा युगो-युगो से भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण अंग रही है। उस सं...
अन्य रचनाएंमिलता नहीं निर्मित करना होता है जीवन, जो मिलता है वो जीवन नहीं केवल जन्म है, तरतीब से छूने होते है संगीत के सब तार, बस यही जीवन की वीणा ...
अन्य रचनाएं"हौसले के तरकस में कोशिश का वो तीर जिन्दा रखो, हार जाओ चाहे जिन्दगी में सब कुछ लेकिन फिर से जीतने की उम्मीद जिन्दा रखो....
अन्य रचनाएंगाये मेघ मल्हार ये कैसा मौसम आया, बरसे मोती के हार ये कैसा मौसम आयाl सातों रँग में रँगी सुहागन धरती रानी, मान ली मनुहार, ये कैसा मौसम आया...
अन्य रचनाएंएक तरफ भयंकर महामारी, मृतक शरीरों से पटी,ढकी ये धरती और प्राण वायु की आश में बैठी या लेटी जिंदा लाशें है और वही उसी वक्त, उ...
अन्य रचनाएं"मुश्किल घड़ी में आश खोज पाएंगे क्या? साथ,प्यार, लोगों का विश्वास खरीद पाएंगे क्या ? जिन पैसों के खातिर ब्लैक कर रहे हैं दबाएं और सिल...
अन्य रचनाएंहै जीतता खेल में कोई , खेल में कोई हारता है पर सत्य विजेता है वही जो, अपने प्रदर्शन पे सबकुछ वारता हैl न होता जिसे जय का मोह , दुःख पराज...
अन्य रचनाएंसत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् क्योंकि सत्य, एक परीक्षण है, एक द्वंद है, वक्ता के साहस और श्रोता की सहनशक्ति का जिसमे एक सत्य कह नहीं पत...
अन्य रचनाएंअपने स्कूल के दिनों में कुरुक्षेत्र या फिर गुरु की कॉपी(ठीक से याद नहीं) की पिछली जिल्द पर एक प्रेरक प्रसंग पढ़ा था, जिसमें महाभारत...
अन्य रचनाएंबनने चले थे हम कुदरत के नियंता और नियामक पर जाने क्यों भूल गये थे एकांत स्वार्थ के मानक पर वह क्या कोई मानव है जो, अपने में सबकुछ भर लिया प...
अन्य रचनाएंक्यों न कई नई, कोमल पौध लगा बनायें, 'दशपुत्रों समों द्रूम' अब जीवन मंत्र नहीं तो ढोती रहेंगी जिंदगियाँ यूँ ही,जीने को प्राण वायु य...
अन्य रचनाएंसंग चलते नहीं एक भी कदम, न मिलाते स्वर से स्वर गर कोई जो हो जाए खड़ा अन्याय के विरुद्ध कुछ कहने को, कुछ कर गुजरने को अत्याचारों का सैलाब ...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022