वीर सैनिक थे बड़े मातृभूमि पर चढ़े, घर में सभी के ऐसा लाल होना चाहिये। पीठ पीछे वार करें धोखा देकर जो लड़े प्रतिकार का अब तो न...
अन्य रचनाएंनिरंतर छठवी जीत की बहुत बहुत बधाई और क्यों न हो!! तुमने वो कर दिखाया जो कोई न कर सका, परंतु तुम इस *भ्रम* में मत रहना !! कि यह ज...
अन्य रचनाएंजन्मते ही बेटा बढ़ जाती है "देहरी" सवा हाथ !! सुना था ,दादी नानी से होती है लक्ष्मणरेखा बेटियों के लिए !! जो पार कर...
अन्य रचनाएंबच्चों सुन लो एक कहानी कहती थी जो मेरी नानी बाग बगीचे वृक्ष घने थे आंगन ही उपवन बने थे निर्मल था नदियों का पानी बच्चों सुन लो एक...
अन्य रचनाएंबचपन में मां कभी-कभी रहती थी मैं डरी डरी!! कभी अंधेरे में डर जाती या परछाई सी दिख जाती, पेड़ों के पत्ते हिलते थे, चूहा या बिल्...
अन्य रचनाएंख्वाइशें कहाँ पूरी होती हैं ? झोपड़ी मे फली फूली महलों में अधूरी होती हैं ख्वाहिशें कहाँ पूरी होती है? मुख मोड़ लेता है सहारा बूढ़ी आँखे बे...
अन्य रचनाएंमैंने अपने आँगन में कुछ विरवे रोपे थे खाद पानी से सींचा और बहुत दुलराया और एक दिन चटकी कलियां फूल और फल भी आये संग साथ में ...
अन्य रचनाएंहाथों में थामे हाथ मुझे ले चला कहाँ हाथों में थामे हाथ- - मैं हो गई हूँ तेरी तू हो गया है मेरा ले चल मुझे वहीं पर बस ...
अन्य रचनाएंसभी महिला मजदूरों को सादर समर्पित🙏 माथे तगाड़ी फटी साड़ी, फावड़े से भरती गिट्टी कभी रेत कभी मिट्टी, गेंती और सब्बल सम्ह...
अन्य रचनाएंहर पल तेरा नाम रटे बिल्कुल रट्टू तोता है दिल ही तो है... आँखों आँखों में रात कटे जगता है न सोता है ...
अन्य रचनाएंजन्मते ही बेटा बढ़ जाती है "देहरी" सवा हाथ !! सुना था ,दादी नानी से होती है लक्ष्मणरेखा बेटियों के लिए !! जो पार कर...
अन्य रचनाएंमैने तो यूँ ही कह दिया वो दिल से लगा बैठे ख़्वावों ख्यालों में अपना बना बैठे... लकीरें कहाँ थीं हाथों में मेरी मैं तो बसी थी ब...
अन्य रचनाएंधरती पे छाया राग अंबुआ रये बौराये कुहू कुहू कोयल कूके मन मोरा हर्षाये याद तिहारी आये, धरती पर छाई हरयाली जामुन लदीं डाली डाली ते...
अन्य रचनाएंबचपन में मां कभी-कभी रहती थी मैं डरी डरी!! कभी अंधेरे में डर जाती या परछाई सी दिख जाती, पेड़ों के पत्ते हिलते थे, चूहा या बिल्...
अन्य रचनाएंगिद्ध भोज का रिवाज खूब चल गया आज कलेऊ ओ गारी गीत जेवनार कहाँ गये। पंगत में बैठकर बूंदी सेव दाल भात एक और खाओ साब मनुहार कहाँ ...
अन्य रचनाएंकभी न था ऐसा अनुमान! सुनाएगी प्रकृति फरमान यूँ ही छोड़ते हैं वृक्ष जिस प्राणवायु को.. मारा मारा फिर रहा इंसान अंधाधुंध काटा.. ...
अन्य रचनाएंकाश, फिर वही अलसायी भोर वही मस्तानी शाम होती उस अनदेखे- अनजाने संग कभी हँसती कभी रोती! पढ़ने के बहाने फिल्मी गीत और शायरियां लिखती कभी ग...
अन्य रचनाएंआओ हम सब दीप जलायें अंतर तम को दूर भगायें आओ हम सब दीप जलायें, जीवन की इस कठिन डगर में प्रकृति के इस महाकहर में विश्वासों की ...
अन्य रचनाएंराम तेरी मर्यादा को आज मैंने है जाना आत्मसात किया तब मैंने यह माना! त्रेता से कलजुग तक सुनते आये गाथा, लाख मुसीबत आई पर तो...
अन्य रचनाएंपर्यावरण दिवस पर विशेष मैंने अपने आँगन में कुछ विरवे रोपे थे खाद पानी से सींचा बहुत बहुत दुलराया और एक दिन चटकी कलियां, फूल औ...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022