कठोर बनकर घरदारी सिखाती है, अच्छे बुरे की पहचान हर कंदम पर करवाती हैं, मेरी नादानियों पर औरो की डाट चुपचाप सह लेती है, लेकिन इस ...
अन्य रचनाएंजीवन है एक अग्निपथ नित नए संघषो का मेला यहा जीने की जिसे चाह यहा भला उसे कौन रोक पाया है।। जीवन मे न हो यदि सुख दुःख संगम तब तक...
अन्य रचनाएंबनकर अपना वो गम ए जिंदगी में आया था शायद कोई सबक हमें जिंदगी का सिखाने आया था बड़े मासूम थे हम जो गैरो पर यक़ी जल्द कर लेते थे उनकी कही बातो ...
अन्य रचनाएंबनकर अपना कोई ,बेगाना आया था, मुहब्बत की साज़िश कर हमे भरमाने आया था।। हम भी बनकर कठपुतली उंसके इशारो पर नाचते रहे, कहा जानते थे कि वो दिल बह...
अन्य रचनाएंशब्दो की मर्यादा अब कहा!! कहा बड़ो का सम्मान रह गया!! घर हो बाहर सब राजनीति का अखाड़ा बनकर रख गया।। पद प्रतिष्ठा की लालसा में , रिश्तों का मो...
अन्य रचनाएंभाय भाय करती रात घोर अंधकार का डेरा है, आगे पग कैसे धरू भूतों का बसेरा है।। सुना है वो अपनो की आवाज में सबको रिझाती है , पा...
अन्य रचनाएंरेगिस्तान की तपती रेत,में एक बुढ़िया अपनी झुकी हुई कमर और कपकपाते हाथो में लाठी टेकते हुए चली आ रही थी,, ये सिलसिला उसका आज से नह...
अन्य रचनाएंबधाई नही अधिकार चाहिए मैं नारी हूँ, मुझे संम्मान चाहिए ।,। समान है जब हम दोनों तो फिर ये भेदभाव की बेड़िया क्यो,।। क्यो सब लोकलाज...
अन्य रचनाएंइज़हार कुछ तरह हुआ इश्क़ का की अब दुनिया बेगानी सी लगती है जिन्हें कल तक जानतें भी न थे आज उनमें दुनिया हमारी बसती है।। बड़ा मनमौजी...
अन्य रचनाएंसंयुक्त परिवार हर गम बाँट लेते है,, तुम हो कितने भी दुःखी तुम्हारा साथ नही छोड़ते है।। बनी रहे तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान, हर सदस्...
अन्य रचनाएंसुबह सुबह न जाने क्या बात हो गई, श्रीमती सी मुझे खफ़ा हो गई,,,।। पूछ पूछ कर मै थक सा गया हूँ, न जाने क्या ख़ता मुझसे जो हो गयी है।...
अन्य रचनाएंख़ामोश थे लब उसके मगर उसकी आँखें उसका हाले ए दिल बया कर रही थी इन्तज़ार जो आँखो दे गया था वो आया ही कुछ इस तरह से था हाथो की मेहंदी अभी ताज़ी...
अन्य रचनाएंबड़े भाग्य से मैंने नारी तन है पाया, अलग -अलग रूप लेकर मैंने जीवन को है बचाया।। कभी वकील तो, कभी शिक्षिका बनकर जीवन को है सवारा।। कभी मालि...
अन्य रचनाएंचूड़ी कंगन,पायल ,बिंदिया, सब गुजरे जमाने की बाते है,,,,, जब से होश संभाला है, खुद को स्वेत रंग में जाना है।। अभी तो गूँजी थी, मेर...
अन्य रचनाएंअनजानी सी डगर में तुमसे मुलाक़ात हुई, अगल थे हम एक दुजे से, फिर भी आँखो ही आँखो में बात हुई।। तू पूरब तो मैं पश्चिम थी, विचारों क...
अन्य रचनाएंकल थे जो अंजान मुझसे, आज पल भर में मेरे हो गए, जिनको देखा न था आज से पहले, कभी आज वो जान हमारी बन गए।। मेरे साथी मेरे हमदम तेरे ...
अन्य रचनाएंगमो के शहर में, हम मुस्कुराहट ढूढ रहे थे, घना था धूप मगर हम छाया ढूढ रहे थे, अब हम से न पूछो यारो पता हमारा , हम अपने ही शहर म...
अन्य रचनाएंचलो आज हड़ताल करते है, जिम्मेदारियों से लेकर छुट्टी, चलो, आज अपने लिए जीते है।। कहने को घर की मालकिन हूँ मैं, लेकिन मेरी मर्ज़ी को...
अन्य रचनाएंतकदीर का खेल भी निराला है, जो कल तक हमारे कत्ल का ख़ाब देखते थे, आज हमने उन्हें अपने कदमो में पाया है।। दूर जाकर भी वो हमसे दूर ...
अन्य रचनाएंजल बिन सब सून सखी, क्या जग और क्या जीवन।। क्या मानव !!. क्या पशु पक्षी , क्या उपवन के सारे फूल सबकी साँसो का आधार पानी बिन सब क...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022