हे ! भारत के वीर जवान, तुझसे है जिंदा यह हिंदुस्तान पिता तेरा यह खुला आकाश, सरहद की भूमि तेरी मात समान। हे ! भारत के वीर जवान। तेरी ...
अन्य रचनाएंकहां जा रहे हो, हे देश के अग्निवीरों, तनिक ठहरो! और झांकों अपने अंतर्मन में, तुम्हीं हो शक्ति पुंज, इस राष्ट्र के निर्माण के, फिर क्...
अन्य रचनाएंजिसकी छाया में तू है खड़ा, उसी पर ऐसा कठोर प्रहार, मत काट मुझे ऐ निष्ठुर प्राणी, मैं हूं तेरे जीवन का आधार। रेगिस्तान बन जाएगी यह धरा, पानी ...
अन्य रचनाएंफिर से वही सर्द तन्हाई, फिर से वही बरसात है, जो तेरे आने से पहले था, अब तेरे जाने के बाद है। फिर से वही पतझड़ के दिन, फिर वही भींगी सी रात ह...
अन्य रचनाएंशोर में भी मौन यह शहर, अपनों में अजनबी यह शहर, रोशनी से चौंधिया देती आंखें, मन के अंधेरों से घिरा यह शहर। किसी रिश्तों में मिठास नहीं है, अप...
अन्य रचनाएंआंधी-तूफानों से लड़ना सिखाते, हर मुश्किल में जो साथ निभाते, सौभाग्यशाली वह जिसने है पाया, हर मुश्किल में मिलती बड़ों की छाया। धै...
अन्य रचनाएंजगी-जगी सी आंखों में, सजते हैं खूबसूरत लम्हें, कभी गुजरे हुए पल के, कभी आने वाले कल के। इस भागती-दौड़ती जिंदगी से, ठहरने को जी करता है, चलूं...
अन्य रचनाएंपूछो ना उनसे हाल जीवन का, जिनके पास कोई रोजगार नहीं, मारे-मारे फिरते हैं सड़कों पर, घर में भी उनका सम्मान नहीं। रहते हैं सदा वो बुझे-बुझे से...
अन्य रचनाएंकुरुक्षेत्र बना यह ह्रदय-स्थल, हार-जीत का परिणाम लिए, धर्म का ध्वज लिए खड़ा युधिष्ठिर, दुर्योधन खड़ा अभिमान लिए। हृदय-स्थल के इस कुरुक्षेत्र...
अन्य रचनाएंमैं बाबुल के बगिया की कली हूं, हंसते मुस्कुराते अभी आधी खिली हूं, न दुनिया का गम न रिश्तों का झमेला, अपनी हीं धुन में गुनगुनाती अलबेली हूं। ...
अन्य रचनाएंइस भागती हुई जिंदगी से, कुछ वक्त चुराया जाए, बुझती हुई आंखों में, एक दीप जलाया जाए। कहने को जब अपने हैं,अपनों की तरह मिला जाए, औरों को अपना ...
अन्य रचनाएंसर्दी की धूप, गर्मी में शीतल छांव है मां, हरी-भरी खेतों सी, एक सुंदर सा गांव है मां। दिल का सुकून, रातों की गहरी नींद है मां, कांधे की थपकी,...
अन्य रचनाएंगर्मी पड़ रही, प्यास बढ़ रही, चलो हम कुछ काम कर आएं, परिंदे खोज रहे हैं पानी, थोड़ा सा जल हम उन्हें पिलाएं। रख कटोरे में दाना और...
अन्य रचनाएंमैं भी विधाता की रची तस्वीर हूं तेरी तरह, सींचकर पसीने से ईंट को, दीवारें बनाता हूं, पर खेल तो देखिए, हमारी भी किस्मत का, दो घड़ी भी घर में ...
अन्य रचनाएंकैसा यह कलयुग है आया, सबके मन को है भरमाया, सोफा पर श्वान को बैठाए, मानव दर-दर ठोकर खाया। कैसा यह कलयुग है आया। पहले पति ही थे प...
अन्य रचनाएंहे मतदाता जानो अपना अधिकार, अपने विवेक से ही चुनना सरकार, झांसे में मत आना, लोभ में मत पड़ना, देना मत उसको, जो सुने तेरी पुकार। ...
अन्य रचनाएंस्वर्ग यहीं है, नर्क यहीं है, यहीं है सब जीवन के रंग, सुख में जीवन स्वर्ग सा लगे, नर्क लगे जब दुख हो संग। है खटखटा रहा नर्क का द्वार, मानव स...
अन्य रचनाएंहार को जीत में बदलता है साहस, आसमां में भी सुराख करता है साहस, सीख चींटी से पर्वत उठाने की कला, तूफानों में दरिया पार कराता है स...
अन्य रचनाएंमांण दुर्गा के नौ रूप हैं, नौ रूपों की महिमा अपनी, इच्छित वर है देने वाली, दुष्ट, पापियों की है विनाशिनी। प्रथम रूप है शैलपुत्री, पर्वतरा...
अन्य रचनाएंआदमी खिलौना वक्त के हाथों का, कभी हंसता तो कभी रोता है, जिस ओर भी ले चले पवन, उस ओर ही बह जाता है। विधाता ने जो पटकथा है लिखी, कहां कोई उससे...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022