लहलहाती ये फसल किसान की नहीं दिखती दुलहन कहीं से कम। पीले खिलते है सरसों के ये फूल लटक रहे जैसे कानों से कर्णफूल। घूँघट सी हैं उ...
अन्य रचनाएंमेरे पड़ोस में कुछ बच्चे थे खेला करते गलबहियां बनाते धमाचौकड़ी थे करते जब आयी महामारी तो नजारे बदल गए चंचल-मन बच्चे किसी कोनें मे...
अन्य रचनाएंये जीवन है, ये चलता ही चला जाता है कोई आके यहां, आँखों मे बस जाता है यादों का क्या है,वो अक्सर टकराती हैं कोई पल ऐसा, जो आके ठहर...
अन्य रचनाएं••••••••••••••••••••••• अभी जब मैं मां के लगाए हुए फूलों के बगीचे में बैठा हूं तो हवा के झोंको से हरसिंगार के छोटे-छोटे फू...
अन्य रचनाएंगमों की बारिश में भीगा है तन टूट गए हैं वीणा के वो तार, रूठा है संगीत मन का अभी पीछा करती हैं तनहाइयाँ बार-बार। इंतजार करना होग...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022