"पापा जी अपनी छड़ी संभाले आगे बढते जा रहे थे! गंतव्य का कोई पता नहीं था.. शरीर शिथिल था और चित्त गतिमान था! विचारों की आंधी का ...
अन्य रचनाएं"पापा जी अपनी छड़ी संभाले आगे बढते जा रहे थे! गंतव्य का कोई पता नहीं था.. शरीर शिथिल था और चित्त गतिमान था! विचारों की आंधी...
अन्य रचनाएं" पापा जी बुढ़ापे की कड़वी हकीकत से रुबरु होते जा रहे थे! "अनुभव ही सबसे बड़ा गुरु होता है..!" पापा जी को नित नय...
अन्य रचनाएं" पापा जी बुढ़ापे की कड़वी हकीकत से रुबरु होते जा रहे थे! "अनुभव ही सबसे बड़ा गुरु होता है..!" पापा जी को नि...
अन्य रचनाएंपापा जी के मन को थोड़ी राहत मिली.. अमन को हमारे जाने से कोई एतराज नहीं है.! रक्षाबंधन नजदीक है.. वहाँ से अभिनव के साथ जाकर अर्चन...
अन्य रचनाएंपापा जी को अमन के बंगलू में रहते हुए एक महीने हो गए थे! राहुल और रुही दादा जी का सामीप्य पाकर अति प्रसन्न थे! बहू- बेटे पूरा ख्...
अन्य रचनाएं"जी पापा.. मुस्लिम चाचा का ये सपना आपके जरिए अवश्य पूरा होगा.. किंतु आप अभी किसी से उनके निवेश की यह चर्चा मत कीजिएगा.. कही...
अन्य रचनाएंरानी बहू.. सभी काम निपटा कर आना मेरे कमरे में.. आज बड़ा बाक्स खोलना है.! माँ जी के शब्दों के साथ ही चेहरे पर प्रसन्नता के भाव ...
अन्य रचनाएं"अमन.. अर्जुन,. अभिनव.. सब आओ यहाँ..! जी पापा जी.?" पापा जी की एक आवाज सुन तीनों बेटे पास आ गए! "बेटा ! अगले हफ्...
अन्य रचनाएं"कुछ नहीं भाभी.. मैं वाशरूम गई थी..!" सुरभी सकपकाते हुए बोली! अच्छा! एनी वे..अब शादी संपन्न कराई जाय! सुर्योदय से पहल...
अन्य रचनाएंआज हमारी शादी की सत्रहवीं वर्ष गांठ है..आप सभी का आशीर्वाद शिरोधार्य है! .चंद पंक्तियाँ निवेदित करती हूँ! सोलह सावन बीत गए कब ...
अन्य रचनाएंभाग -2 "अच्छा! यह जान कर दिल को तसल्ली मिली पर...हम आपके हैं कौन.?" सौरभ मजाकिया लहजे में बोला! "शैली- वी आर...
अन्य रचनाएंउपन्यास से एक अँश- "क्या होता है वृद्धाश्रम..?" एक बुजुर्ग दंपत्ति चाहता है कि जीवन के उत्तरार्ध में वह अपने पौत्र-पौ...
अन्य रचनाएंअम्बर से छाया मिल जाती, भू पर आ जाती नींदे हैं.. कुछ मेरी भी आशाऐं है हैं, मेरी भी कुछ उम्मीदें हैं..। कितने सारे हमउम्र मेरे, ग...
अन्य रचनाएं" आप भी मेरे साथ चलेंगे बाबूजी , क्या रखा है गाँव की गलियों. में ? " सोहेल ने आग्रह पुर्वक बाबूजी से कहा! बाबूजी ...
अन्य रचनाएंसहृदयता.. सुलभता.. सुवासित.. वह आत्मज्ञान.. घेरे हैं चहुँ ओर से ढूंढते हैं कहीं - " उपवास का विज्ञान !" अंतर्निही...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022