मेरी पतंग है मेरे ठाकुर जी के हाथ। मेरे ठाकुर जी रहते हैं मेरे साथ साथ ।। मन मर्जी उनकी चलती मै जोडे़ रहती हाथ। कभी ऊँची गगन उडा़ते कभी धरा...
अन्य रचनाएंमेरी पतंग है मेरे ठाकुर जी के हाथ। मेरे ठाकुर जी रहते हैं मेरे साथ साथ ।। मन मर्जी उनकी चलती मै जोडे़ रहती हाथ। कभी ऊँची गगन उडा़ते कभी धरा...
अन्य रचनाएंवीर भूमि बुंदेलखंड है बड़े लड़इया जे सरदार। दुश्मन से कबहु ना डरते लोहा लेबे को तैयार।। आन बान और शान के लाने धरे हथेली रहते प्रान। बैरी आओ ...
अन्य रचनाएंवीर भूमि बुंदेलखंड है बड़े लड़इया जे सरदार। दुश्मन से कबहु ना डरते लोहा लेबे को तैयार।। आन बान और शान के लाने धरे हथेली रहते प्रान। बैरी आओ ...
अन्य रचनाएंसनातन धर्म की रक्षक। भोलेनाथ की भक्त अहिल्या बाई शत् शत् नमन।। किया धर्म हित अथक प्रयास शत् शत् नमन। जन जन की सेवा मे रत हर शत् शत् नमन।। ...
अन्य रचनाएंपीलो पीलो पना मोरी जिज्जी की भोतई नोनो बनो। बगिया सें अमियाँ बीन के लाई गुरसी में भूँजीं दओ गुर औ पुदीना डार की जिज्जी भोतई नोनो बनो।। म...
अन्य रचनाएंनारायण को प्यारी एकादशी।। भक्तों की हितकारी एकादशी।। भक्ति भाव बढा़ती एकादशी। सद्गुरू मिलन कराती एकादशी। मुक्ति का मार्ग दिखाती एकादशी।...
अन्य रचनाएंनशे को कहें न जीवन को कहें हाँ। दुखदर्द को मिटा के खुशियों को कहें हाँ।। विषाद को हटा के आनंद को कहें हाँ। सरल हो जीवन सूखमय भविष्य को ...
अन्य रचनाएंदेख कर हाल मौसम का आँख में नमी सी है। तपती धरती घटता धीरज देख कर आँख में नमी सी है।। प्यासे पौधे, पक्षी, राही देख कर आँख में नमी सी है। ...
अन्य रचनाएंजीने की राह सबको गले लगाकर प्रेम भाव फैलाकर। जीने की राह बनाएँ।। दंभ द्वेष पाखंड छोड़कर। जन जन में समभाव फैलाएँ।। जीवन छोटा राह कठिन है। म...
अन्य रचनाएंजीवन में मिला इतना दर्द । ढूंढते रह गए हमदर्द। दर्द इतना था कि भूल गए । कि कोई इसे बांट भी सकता है।। जार जार रोए कि आंसू सूख गए । ना मिला फि...
अन्य रचनाएंजब बढा़ अहंकार मानव ने युद्ध रचाया। मानवता पर संकट छाया।। झोंक दिए जन युद्ध कुण्ड में। दावानल दहकाया।। हथियारों के व्यापारी ने । वक्त सुनहरा...
अन्य रचनाएंसुमिरन करके नारायन को औ सारद के चरन मनाय। सुमिरों काली कलकत्ते की जो असमय में होय सहाय।। हात जोर बिनती मोरी माता महामारी करो बंटाढार। जनता ...
अन्य रचनाएंमैया शीतला को कर लो पूजन ध्यान। काम तोरे बन जैहें।। रोग सोक बे हरबे बारी। सुख के साधन देबे बारी भर दैहें तोरे भंडार।। सीरो भोग मैया के मन भ...
अन्य रचनाएंपंक्षियों को डाल दो दाना और पानी। गर्मी की ऋतु आई चारों ओर उडे़ धूल।। बूँद -बूँद सहेजो मत जाना भूल। प्यासे जीवों के लिए पानी भरकर रखना।। अपन...
अन्य रचनाएंईश्वर की अनुपम सृष्टि न्यारी। विधाता की रचना है नारी।। प्रेम करुणा मर्यादा सहनशीलता रखकर। करती सबकी हर पल रखवारी। सजगता से करती हर काम अपना।...
अन्य रचनाएंबिन्दु का सिन्धु से मिलना तय ही तो है। क्यों न प्यासों की प्यास बुझाता चले।। रूखे चेहरों को चाहत है इक बूंद की। क्यों न उनकी वो रौनक बढा़ता ...
अन्य रचनाएंदिल की जमीन पर उगा पूनम का चाँद बेटी। उमंग,उल्लास, उत्साह जीवन को मधुरिम बनाती बेटी।। पूनम के चाँद सी हर पल प्रगति पथ पर बढ़ती बेटी। तमाम ग...
अन्य रचनाएंआया बसंत लेके उमंग। मचा है रसरंग अब क्या कहिए।। कोकिल की तान भौंरों का गान। फागुन मलंग अब क्या कहिए।। मद भरे नैन मुखरित हैं बैन। चल रही फाग ...
अन्य रचनाएंमाँ शारदे का जन्मदिन। प्रकृति का आनंदोत्सव।। कण कण में उल्लास। कला और कलाकार।। सृजन वागीश्वरी के चरणों में। गाते होली मनाते वाणी उत्सव।। कलम...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022