काव्य रस के प्रकार नौ बताए गए हैं जिनमें वात्सल्य और भक्ति रस को जोड़ा गया है यह कुल मिलाकर 11 होते हैं काव्य रस के इन सभी प्रकारों ...
अन्य रचनाएंकाव्य रस के प्रकार नौ बताए गए हैं जिनमें वात्सल्य और भक्ति रस को जोड़ा गया है यह कुल मिलाकर 11 होते हैं काव्य रस के इन सभी प्रका...
अन्य रचनाएंमानसिक शारीरिक आघात कर अपना दंभित पुरुषुत्व का रूप दिखाते हो जिस हृदय में बसता असीम प्रेम तुम्हारे लिए उसे ही बड़ी निर्लज्जता...
अन्य रचनाएंबदनियति तुम्हारे नजरों कि जो दिलो-दिमाग को तेरे गुमराह करती है और कदम अपने बढ़ा चलते हो लिए मिज़ाज आशिकी के पैंतरे ढकोसलें एक त...
अन्य रचनाएंजिसकी चाहत पर था गुमां दिल को हां सितम दे वो ही तोड़ गया उसको अंखियों का मीत आंसुओं को बना कसक दर्द कि मेरे जिया में सुलगा हुई...
अन्य रचनाएंजब से इमोजी भरी दुनियां ने इस जग में पैर पसराई है मुस्कुराहट की रहस्यमयी पहेली भी कुछ समझ में आई है बेमन की मुस्कानों ने भी अपनी...
अन्य रचनाएंइंसान बुरी लतो को शह दे जाता है। और वो बुरी लतें इंसानियत को मात है।। फरेबी जगत का ये मायाजाल है। करता ज...
अन्य रचनाएंहमारे फौजी भाइयों की फौज जब निकलती है हमारे देश के जन, गण, मन सभी, सुरक्षित रहती हैं।। हमारे फौजी भाइयों की फौज जब निकलती है ...
अन्य रचनाएंजासूसों की जासूसी होने लगी जब खामोशी खामोशी प्यार में होने लगी तब तकुल्लुफ बंदिशे जरा सी वक्त भी हो गया बेरहम छोड़ गई वह भी हम...
अन्य रचनाएंइस मोड़ से जाते हैं जो फिर कभी किसी को क्यूं नहीं दिखाई देते हैं वो"""" अनंत यात्रा के मार्ग पर निकल जाते हैं जो अपनों...
अन्य रचनाएंएक दिन ढलती दोपहरी में अपनी सहेलियों के साथ खेलने निकली गुड़िया अचानक,अपने पड़ोस की चाची को उसने किसी से बात करते हुए देखा। जो ए...
अन्य रचनाएंकैसे मिलेगी मुक्ति इस देह को अनेक चेष्ठाओं से ग्रसित मन को न सत्कर्मों की बेल बढ़ रही सब्ज़बागी दुनिया सिर्फ अपने ही स्वार्थ ग...
अन्य रचनाएंअदृश्य होते सूरज की लालिमा भी कम होती जाती विचरण करते पंछी फिर से अपने नीड़ की ओर है आती दूर से ही घंटी की ध्वनियां,रम्भानें की...
अन्य रचनाएंआनंदिता क्या तुम तैयार हो जाने के लिए श्रीमान जी ने जब आनंदिता से पूछा तो उसने कहा जी नहीं सुबह कितनी आपाधापी रहती है सारा काम एक साथ ही करन...
अन्य रचनाएंआज फिर तुमने अन्न को डस्टबिन में फेंक दिया कल ब्रेड के टुकड़े फेंके थे कुछ ना कुछ फेंकने की गलत आदत पड़ी हुई है तुम्हें रोज रोज...
अन्य रचनाएंघर लौटता फ़ौजी दूर दहशत के अंगारों को छोड़ आता है वह मस्त मौला फौजी सुकून के चंद पल बिताने वह मनमौजी ढेर सारे अरमानों को मन म...
अन्य रचनाएंव्यर्थ ही अपना समय गंवाने का कोई सबब ही नही कहीं ठहर कर हम अपने ही ताबीरों को ध्वस्त करते जाएंगे लगन और हौसलों के दम पर ही हम ...
अन्य रचनाएंरविवार शाम को 5:00 बजे तीनों इंडियन कैफे हाउस में पहुंचकर बेसब्री से मां पापा की पसंद का इंतजार करने लगते हैं। रिक्तिमा कैफे में...
अन्य रचनाएंअवंतिका कैफे में बैठकर रिद्धिमा का इंतजार कर रही थी और उनके सामने दो और व्यक्ति बैठे हुए थे जिसे देख रिक्तिमा थोड़ी आशंकित गई क्...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022