प्रिय बचपन, ऐ बचपन तेरी याद मुझे , अब रह-रहकर तड़पाती है। क्यूँ तुम मुझसे रूठ गई, क्यों याद न मेरी आती है। तेरी कोमल गोदी में मै...
अन्य रचनाएंकातर आंँखों से चांँद सूरज धरती को गौर से देख रहे, लाखों सवाल है आंँखों में मानो लोगों से पूछ रहे।। भू, जंगल, उपवन बेच दिए तूम नी...
अन्य रचनाएंमाँ, मैंने कल सपना देखा। सूरज के कांँधे पर चढ़कर भोर - किरन का डेरा देखा, माँ ,मैंने कल सपना देखा। तितली के संग उड़ते उड़ते फूलो...
अन्य रचनाएंसिद्धार्थ और बुद्ध शाक्य वंश का राज दुलारा शुद्धोधन- गौतमी का प्यारा। राज- वैभव को समझ के माया पत्नी, पुत्र, राज ठुकराया। देख बी...
अन्य रचनाएंमायके में मांँ ने समझाया था पराए घर जाना है, संस्कारों की पोटली को धैर्य की झोली में, सहेज पर रखो। मान और मर्यादा को, आचार और वि...
अन्य रचनाएंखुशियों की तिजोरी की सुलभ सी कुंजी हूंँ, जीवन के अनुभवों की अक्षय पूंँजी हूंँ। तपती दोपहरी में, घने पेड़ की छाया हूंँ, पिता का स...
अन्य रचनाएंबहुत शांत है गलियांँ मेरे शहर की लगता है, सन्नाटों का कहर है। कभी हंँसती खिलखिलाती जिंदगी थी, आज खौफ के साथ हवा में भी जहर है। ह...
अन्य रचनाएंखुशियों की रसधार हो तुम, निर्मल गंगा की धार हो तुम, आंँखों में प्यार झलकता है, दिल में जिसके रब बसता है, मेरे मन का उद्गार हो ...
अन्य रचनाएंकभी लोगों से ,कभी बातों से, कभी अपने ही हालातों से, हर कदम चुनौती देती है, सृष्टि की सुंदर ये रचना हर रूप में पूरी होती है। कभी ...
अन्य रचनाएंश्रम ही कर्म, श्रम ही धर्म श्रम ही जीने का आधार। हांँ ,जी हांँ! मैं श्रमिक हूँ, करता हूंँ खून- पसीने का व्यापार। एड़ी से चोटी एक...
अन्य रचनाएंमेरा बचपन इक जादू था जादूगरनी मेरी माँ थी हर बार दुआ ही निकलती थी जब -जब वो पलक को झपकती थी। जब चोट जोर से लगती थी माँ फूँक ...
अन्य रचनाएंतरकश है तेरा भरा हुआ क्यों अंतर्मन तेरा खाली है अब लक्ष्य भेदने में तुमने क्यों दुविधा मन में पाली है । दुंदुभी बजा कर्मों की तू...
अन्य रचनाएंमन की वीणा जब बजने लगी डोरी पतंग में बंँधने लगी अब सर्द रात को हुआ अंत लो आया फिर से नया बसंत। सरसों के पीले खेतों में तितली बन ...
अन्य रचनाएंप्रिय बचपन, ऐ बचपन तेरी याद मुझे, अब रह रह कर तड़पाती है। क्यूंँ तुम मुझसे रूठ गई, क्यों याद न मेरी आती है। तेरी कोमल गोदी में म...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022