मेरे पथ प्रदर्शक के लिए सरेआम कोई सवाल न पुछो। किस तरह किया होगा उजाला मेरी राहों में हाल न पूछो। कभी चाहतों को जलाया होगा कभी अ...
अन्य रचनाएंअपनी आजादी के संघर्षों को याद कर आओ गणतंत्र पर्व मनाएं । शहीदों को भाव भीनी श्रद्धांजलि देकर आओ तिरंगा फहराएं। पर फहराते तिरंगे ...
अन्य रचनाएंऊषाकाल सी लाली मुख पर,आया जोश नया है। उनींदी आंखों से जाग कर पाया होश नया है। हर ओर सुनहरी ऊर्जा का स्वर्ण घेरा छाने को है, गौरव...
अन्य रचनाएंउष्णता से मिलन के पहले था शांत शीतल जल। आंच की छुअन से ही हमारे प्रेम की भांति पड़ा उबल।। फिर डाली उसमें मैंने चंद चायपत्ती तेर...
अन्य रचनाएंजैसे तू मुझे संभाले है वैसे मैं सहारा तेरा हूं, परिवर्तन को छुपाए तेरे जीवन का फेरा हूं। तू नवकिसलय सा और मै घना वृक्ष अविचल, ...
अन्य रचनाएंप्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवन धारा यूं बहने दो । मन अनुसार न होगा हरदम उतार चढ़ाव जरा सहने दो । थाम दी जा...
अन्य रचनाएंबचपन से लेकर जवानी तक। तुम्हें सताने की मनमानी तक। श्रेष्ठता का भाव मेरे अंदर था। जलन का बहुत बड़ा समंदर था। बिन बात तुम्हे नीचा...
अन्य रचनाएंउसने कहा" मैं मां को साथ नहीं रखूंगा"। क्यों ?" जज ने पूछा "इस बुढ़ापे में तुम ही तो उसका सहारा हो फिर ये रव...
अन्य रचनाएंबड़ा ही व्यापक शब्द है... एहसास या अनुभूति...। और विरोधाभास की तरह... बड़ा ही संकुचित भी...। किसी एक बिंदु पे आकर ... तेरे एहसास...
अन्य रचनाएंमेरे स्कूल न जाने पर पिता की वो पिटाई...आज भी याद है।। उसके बाद उनकी आंखें थी जो छलक आई... आज भी याद है।। जब उन हाथों पे रख...
अन्य रचनाएं2122 2122 2122 212 दर्द है आवाम सारी मजहबी दिखने लगी क्या कहूं तुमसे धरम की बंदगी दिखने लगी।। जिस्म के संग रूह भी वो बेच बैठें ह...
अन्य रचनाएंदेख असंख्य दीपों की दीपमाला विस्मित खड़ा घनघोर तम काला। आज अमावस ठौर नहीं उसकी दीए तले छुप के डेरा उसने डाला।। गहन त...
अन्य रचनाएं++++ प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवन धारा यूं बहने दो । मन अनुसार न होगा हरदम उतार चढ़ाव जरा सहने ...
अन्य रचनाएंओ चांद ! आज तेरी प्रतीक्षा में मैंने सारा दिवस जतन करते बिसार दिया । तेरी एक झलक पाने को "सुधांशु तन मन अपना प्रसन्नता से संवार ...
अन्य रचनाएं--------------- हे! नवदुर्गा ! , हे! परमेश्वरी! हे! परम पूज्य माता, इस पर्व पर मेरी विनती... तुझसे कुछ विशेष रहे। हे!पह...
अन्य रचनाएंअच्छा हूआ कि खत्म हुआ दिल्लगी का वो बेरंग सिलसिला, न मुहब्बत न नफरत, रस्मों रिवाज भी रहा बेहद ढीला, पारावार की मौजों में उफनती ...
अन्य रचनाएंमेरे जन्म लेते ही तुम लगे सर झुकाने। तब से ही मेरे ब्याह हेतु लगे रुपए जुटाने।। मुझे निर्बल सा बना जीवन की सीख न दी। मेरे 'प...
अन्य रचनाएं"आज क्या क्या खरीदा आपने मेले में" दादी ने रिया से पूछा जो मेला घूमकर बहुत खुश लग रही थी। बच्चे भी न! कितनी मामू...
अन्य रचनाएं-------------- रेशमी डोर रक्षा की कभी पिघलती नहीं। मियाद हमारे प्रेम की कभी ढलती नहीं।। तुम चाहे दूर रहो चाहे पास मेरे। बहन की आ...
अन्य रचनाएंआओ तिरंगा फहराते हैं... स्वतंत्रता का पर्व मनाते है... साल में एकबार हमने झंडोत्तोलन कर लिया अपनी आजादी के संघर्षों को याद कर ल...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022