करीब ही थी मंजिल जरासी चंद सांसे कुछ दगा कर गयी । उस पार तलक थी साथ जरासी जिने की वजह दगा कर गयी । निगाह मे समाये असमान को वो...
अन्य रचनाएंघिरी आज सावान की वो लडी बरसात है महक रही इन साँसो मै वो सुगंध बाकी है | जहां में एक मैं ही नही हर शक्स परेशान है सोच पर कर लू हा...
अन्य रचनाएंकुछ भिनी भिनीसी चंचल हवा रुमानीसी बहक रहे वो कदम समझा जिन्हे संभले से कुछ तो अपनीसी लगी छाव मनभायीसी गुजर रहे वो राह भी दिख...
अन्य रचनाएंवह राह जरा घिरी घिरी बहक रही बेवफा फिजा भी ना देख मुडके अजनबी सी जिन्दा हुयी है लाशे बहार की भूली बिसरिसी यादे अनकही पल द...
अन्य रचनाएंजरा जरासी खफा थी हुयी सांझ भी बेफिकीर जी रही खामोशि थी बया कर गयी नाराजगी से कत्ल हो रही साँसे इस दिल की कह रही बेपनाह मोहब्बत बया हो रह...
अन्य रचनाएंगुजर रहे बेगाने से हमारे अश्क वजह जो उन्ही पे दिलनिसार हैं बेशक यह फिजाये फितरत पर उतारू हैं गुजर रहे बेगाने से हमारे दिल क...
अन्य रचनाएंदिल सवाल करे हैं.. बैचैनी सी क्यूं जी रहे हो मौत को गले लगाये जिंदगी क्यु माँग रहे हो... राहतो से न जाने कितने दुर हुये है....
अन्य रचनाएंचल खामोशिया बया करे कुछ तेरी कुछ मेरी बात कहे थम चली जो किस्मते चल उन्ही राहो पर चले बहकती लहरोँकी तरह बेवजह ही बहते रहे मिली अगर डगर ...
अन्य रचनाएंतपती धुप हैं यह जीवन प्यासी धरती सा मेरा मन अंबर की छाव हो जैसे ममता का यह आंचल कोई शिकायत नही कोई गिला नही जिंदगीसे साथ न रहे ना सही ...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022