विप्र था ऐसा जिनकी पहुँच थी ब्रह्म तक, ब्राह्मण होकर तप- धाम हुआ करता था, विप्र था तो अग्नि जैसी आंच भी थी उसमें, सौम्य मुख ज्ञा...