नभ में काली- काली बदरा छा जाती है प्रेम का राग छेड़कर मधुर गीत सुनाती हैं। बारिश की बूंदे,,,,,,,,,,,, अठखेलियाँ करके जिया ललचाती है ...
अन्य रचनाएंनभ में काली- काली बदरा छा जाती है प्रेम का राग छेड़कर मधुर गीत सुनाती हैं। बारिश की बूंदे,,,,,,,,,,,, अठखेलियाँ करके जिया ललचाती...
अन्य रचनाएंजब सांझा चूल्हा घर में जलता था दादी, सौंधी -सौंधी मिट्टी से चूल्हा लेप दिया करती थी मांँ कोयला सजाकर अग्नि प्रज्वलित कर देती मांँ, च...
अन्य रचनाएंजब सांझा चूल्हा घर में जलता था दादी, सौंधी -सौंधी मिट्टी से चूल्हा लेप दिया करती थी मांँ कोयला सजाकर अग्नि प्रज्वलित कर देती मां...
अन्य रचनाएंतिनका - तिनका जोड़ कर घर बनाते हो तुम जीवन में आई आंधियों से घबराकर शराब की बोतल को अपना गम का साथी मानकर मित्र बना लेते हो तुम बिन...
अन्य रचनाएंतिनका - तिनका जोड़ कर घर बनाते हो तुम जीवन में आई आंधियों से घबराकर शराब की बोतल को अपना गम का साथी मानकर मित्र बना लेते हो तुम...
अन्य रचनाएंजो लोग बीते हुए कल के साथ अंतस् में कड़वाहट भरकर जिंदगी जीतें हैं न तो वो खुद ही खुश रहतें हैं न हीं ओंरों को खुश रहने देंतें है...
अन्य रचनाएंजब भी लगे रक्तदान शिविर तो जरूर करें रक्तदान रक्तदान होता हैं महादान रक्तदान करने से स्वयं के शरीर में होता लाभ, नहीं होता को...
अन्य रचनाएंमै माँ के लिए क्या लिखूँ जो स्वयं ही सृष्टि की रचनाकार है जिसके आगे तीन लोक के देवता भी नतमस्तक करते है उस जननी को नित्य, मै बार...
अन्य रचनाएंचिलचिलाती धूप में तालाब पोखर सब सूख गए। बूँद -बूँद पानी के लिए व्याकुल पंक्षी प्यासे मरे जाए। पानी की तलाश मे पिपासु पंक्षी इतउ...
अन्य रचनाएंमै मजदूर हूँ , मैं मजदूरी कर के खाता हूँ मेहनत करके दो वक्त की रोटी कमाता हूँ। छोटी सी टूटी- फूटी झोंपड़े मे रहकर गुजर बसर करता ह...
अन्य रचनाएंमै कोई मिट्टी की मूरत नहीं न हीं तुम कोई कुम्हार हों। जो मुझे अपने मनचाहें आकार कें अनुरूप मुझें ढालोगें और मै ढल जाऊँगी मै कोई ...
अन्य रचनाएंभारत में दूरदर्शन की स्थापना 15 सितंबर 1959 को दिल्ली में हुई थी। शुरुआत में टेलीविजन पर प्रसारण आधे -आधे घंटे के लिए किया जाता ...
अन्य रचनाएंजब कोई बात दिल में घर बना लेती है दिमाग में जाकर ताण्डव मचाती है। तब दिल और दिमाग में द्वंद छिड़ जाती है तनाव और चिंतन से इंसान उ...
अन्य रचनाएंजीवन में जब भी चुनौतियाँ ललकारती है उसे खुले दिल से स्वीकार करो। तब तक हार न मानो जब तक जीत हासिल न कर लो। कमर कसकर हर चुनौतिय...
अन्य रचनाएंएक ही दिन क्यों मनाए हम ,महिला दिवस जबकि हर दिन महिलाओं का होता है दिन की शुरुआत होती है महिला सुबह की आरती ,शंखनाद होती है महिल...
अन्य रचनाएंसाहित्य और साहित्यिकार का आपस मे गहरा नाता है साहित्यिकार व़ो ही रचता जो समाज उसे दिखाता है साहित्यिकार पारदर्शी , दूरदर्शी , नि...
अन्य रचनाएंमानो या ना मानो किंतु ये सच है इंसान स्वार्थी हो गया है भूल गया अपनी संस्कार और संस्कृति को इस कदर लालच के अंधी दौड़ मे शामिल ह...
अन्य रचनाएंरंग बिरंगा मेरा छाता छाता खुलते ही घेर घुमेरदार हो जाता बंद होकर दादा जी की छड़ी बन जाता बरखा की बूँदै से मुझे भींगने से बचाता तप...
अन्य रचनाएंरोने से क्या होगा क्या रोने से समस्या का समाधान मिल जाएगा एक बार विफल हो गए तो क्या हुआ दुबारा कोशिश करो तब तक कोशिश करते रहो ...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022