1 आप ही विचाइये हर ओर बढ़ी भीड़, तोड़ रही जग रीढ़, सुविधाएँ घट रहीं, आप ही विचारिये। कारण जनसंख्या के, प्रतिदिन बढ़ रही, रोटी की किल्लत पर, बव...