सात सुरों पर करतीं थी राज। कोयल से भी मीठी आवाज।। सुनकर उनके गीतों का साज। भूलें श्रोता अपना हर काज।। स्वर कोकिला नाम था पाय...
अन्य रचनाएंप्रिय बसंत रितु आ गई, बहती प्यारी वात। फूल वृक्ष सब झूमते, हिले जोर से पात।। क्यारी न्यारी लग रही, खिले पुष्प सब रंग। भौंरे गाना गा रहे,...
अन्य रचनाएंदेश हमारा सोने की चिड़िया, यूं ही नहीं कहलाता है। भारत की महिमा सुनो सभी, यह स्वर्ग सभी को भाता है।। भारत रूपी घर में देखो, सब धर्म...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022