प्रकृति का स्वरुप पर्यावरण स्वच्छंद अलमस्त विचरति हवा हरियाली से भरी धरती फूलों पर मंडराते इतराते भौरें तितलियां कल कल करते बहते झरने बादलो...
अन्य रचनाएंएक आम सी गृहिणी है सुचित्रा। सबके काम पर निकलने के बाद सुबह के काम निपटाने के क्रम में बिछावन ठीक करती हुई, उसी बिछावन पर निढ़ाल सी बैठ जाती...
अन्य रचनाएंअरे आज तो दीपक भैया का जन्मदिन है। छवि हड़बड़ाती सी घर में घुसते हुए बोलती है। दीपक ऊपर वाले कमरे में बैठा हताश सुन रहा था.. माँ सुन रही हो ...
अन्य रचनाएंबाबु जी इस बार सरस्वती पूजा के दिन आपको भी मेरे साथ महाविद्यालय चलना है.. सेवानिवृत्त प्राचार्य दीनदयाल जी के प्राध्यापक सुपुत्र शिवेश्वर जी...
अन्य रचनाएंजाने कब ये लड़का शादी करेगा। तीस का होने चला.. अच्छी भली नौकरी है।एक से एक रिश्ते ठुकरा कर जाने क्या खोज रहा है। अपनी किट्टी से आकर शक्ति जी...
अन्य रचनाएंनहीं नहीं ऐसा मत करो..ओह मेरा चेहरा झुलस गया। बहुत दर्द हो रहा है मुझे..मुझे ऐसी हालत में देखकर मेरे मम्मी पापा मर जाएंगे..नींद में एक अजीब ...
अन्य रचनाएंफुदकती आती घर गौरैया रूनझुन बजाती आती गौरैया किलोल करती मधुरव मधुरव हँसती मुस्काती चहचहाती गौरैया बड़ी होती जाने कैसे सीख जाती दुनियादारी ये...
अन्य रचनाएंदिलों का उद्गार उल्लास उमंग परिलक्षित करता त्योहार की थाली पूजा अर्चना मनमोहक सा मनभावन होता त्योहार की थाली भक्ति करता मन ईश्वर की अराध...
अन्य रचनाएंमहिला सशक्तिकरण.. बहुत ही लुभावना और मनमोहक शब्द । बेशक महिलाओं की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। नौकरी करने लगी हैं.. कभी कभी कुछेक निर्णय मे...
अन्य रचनाएंशिव शक्ति की उपासना का त्योहार बिन माँगे मोती मिले सबको उपहार प्रकृति पुरुष नहीं इक दूजे से विलग बना है महाशिवरात्रि इसका आधा...
अन्य रचनाएंढ़लती शाम सूरज का साथ क्षितिज से मुलाकात खारा पानी हाथों में हाथ हसीन सा ख्वाब उर की धड़कन दरिया-ए-इश्क उमड़ता प्यार अनक...
अन्य रचनाएंहृदय का हर कोना है प्रेम सुवासित खिली खिली धूप भी लगे है सुहानी हर तराना गाता जाए गाँव हमारा लाभ हानि सुख दुःख अंक में समेट अपनाता हर्षित हो...
अन्य रचनाएंहै झूठ से बड़ा कोई पाप नहीं, फिर भी सत्य को अपनाते नहीं। झूठ चैन की नींद देता नहीं, सत्य की राह पर हम चलते नहीं। झूठ पीतल सा चमकता कुछ दे...
अन्य रचनाएंमौन हुई है प्रकृति मौन है सुर संगीत भाव की मुखरता लता संग खोई है प्रारब्ध देख दंग है पुत्री चली माँ संग है विकल हुई देश दुनिया साज भी हुई भ...
अन्य रचनाएंडरी सहमी दोनों बच्चियाँ मेधा और मेघा आकर जमीन पर गिरी माँ के पास बैठ गई। रीमा ने उठकर दोनों को अंक में भर लिया था। तुम जैसी गँवार के साथ नही...
अन्य रचनाएंआज जाने सुबह से कैसा लग रहा है। मन भी बेलगाम घोड़ा सा अतीत की गलियारों में दौड़ रहा है। अतीत की सुप्त यादों में सुगबुगाहट हो रही है, मानो नी...
अन्य रचनाएंखट्टी-मीठी यादों की करके बरसात, बंद कर लिये तूने दरवाजे अकस्मात। बेहतर था जो हम अपरिचित होते, ना होती कभी अश्कों से मुलाकात। बेचैनियों की ...
अन्य रचनाएंभारत की मिट्टी ने गौरव ऐसा पाया था प्रकृति ने भी हर्षोल्लास मनाया था अठारह सौ तिरसठ बारह जनवरी था जन्म लेकर एक युगपुरुष आया था...
अन्य रचनाएंकंपनी में टीम लीडर बनाए जाने के बावजूद सॉफ्टवेयर इंजीनियर भव्या बहुत उदास थी। I जिसने भी उसे बधाई दिया.. ये कहते हुए कि तुम्हारी खूबसूरती ने...
अन्य रचनाएंमौसम का बदला है रूख शीत ऋतु ने दी है दस्तक ठंडी ठंडी हवा है तड़पाती हड्डियों तक को सिहराती अंगीठी लेकर सारे हैं बैठे अपने अपने घरों में ह...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022