साल दर साल गुजरते ये साल चुरा कर चल देते हैं लुनाइयाँ चेहरे से, अल्हड़पन मुस्कानों से, कौतुहल आँखों से, उन गुजरे सालों को मुट्ठी में जकड़ने ...