रेशमी कलम से लेख लिखने वाले तुम भी अभाव से ग्रस्त कभी रोए हो बीमार बच्चे की की दवा जुटाने मे क्या घर पर तुम भी पेट बाधकर सोए हो देखा है गाँ...
अन्य रचनाएंये आदमी जो दौड़ रहा है और भटका सा दिन में लगता है वो शांत रात्रि में संभल जाता है जैसे कोई संत बन जाता है खुद को समझा देता है ख्वाहिशों को ज...
अन्य रचनाएंहर तस्वीर कुछ कहती है आप ने तस्वीर भेजी मैं ने देखी ग़ौर से हर अदा अच्छी ख़मोशी की अदा अच्छी नहीं रंग ख़ुश्बू और मौसम का बहाना हो गया अपन...
अन्य रचनाएंजो हर पल हँसती है गाती है धूम मचाती है स्त्री चाय के लेबल पे कॉम्पलैन की बोतल पे सर्फ के झाग में रिन के दाग में व्यंजन के हर्ष म...
अन्य रचनाएंसत्यम शिवम सुन्दरम की वह अनुरुप काली, लक्ष्मी, दूर्गा का स्वरूप है नारी नारी मे निहित है ये तीनो रुप दुनिया मानेगी नारी की महिमा...
अन्य रचनाएंपश्चिम की तरफ़ चलता हूँ तो पश्चिम की चीज़ें पूर्व में खिसकने लगती हैं देखता हूँ कि चलना शुरू करते ही भूगोल से मुक्त होने लग...
अन्य रचनाएंबडे धूमधाम से मा बाप ने, कर दिया बेटी का कन्यादान... हाथ जोड़कर कहते रहते, रखना मेरी बेटी का ध्यान.. इतने सालों से बहुत ही लाड प्यार से पाल...
अन्य रचनाएंमाँ शारदे कहाँ, तू वीणा बजा रही हैं-2 किस मंजु ज्ञान से तू, जग को रिझा रही हैं-2 किस भाव में भवानी तू मप्र हो रही हो-2 विनती हमा...
अन्य रचनाएंमैं कोविद-19, बहन फ्लू से मिलता लक्षण हो कुछ भी समरूपता, जांच कीजिए तत्क्षण भयाक्रांत मुझसे दुनिया विकरालता के डर से यात्राएं स्...
अन्य रचनाएंमुझे दास बना लो माँ, एहसान तेरा होगा, धूल का फूल बना लो माँ एहसान तेरा होगा मैं धूल का फूल हूँ माँ, मुझे दुनिया ने ठुकराया-2 मैं गिरता समलत...
अन्य रचनाएंमेंहदी, काजल, बिंदिया क्यों लगाकर आई हो मेरा कत्ल करने या किसी का करने आई हो बे हिसाब नशा ही नशा है तेरे अंग अंग में पीकर आई हो ...
अन्य रचनाएंउदास ताहिर पढ के मेरी मेरे सनम मुस्कुरा ना देना ये आखिरी खत लिख रहा हूँ ख्याल करना जला ना देना तडपा रहे हैं तुम्हारे किस्से बिचार के हम को र...
अन्य रचनाएंकर्म करें कुछ ऐसे जग में जीवन सबका महका दें रह जाती हैं दिल में केवल कुछ खट्टी, कुछ मीठी यादें नैनों में संजोकर रख लो खुशियों के दो-चार पलो...
अन्य रचनाएंकभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता कभी धरती तो कभी आसमान है पिता जन्म दिया है अगर माँ ने,जानेगा जिससे जग वो पहचान है पिता ऊँगली...
अन्य रचनाएंजन्म अठारह सौ तिरसठ की बारह जनवरी को पाया विश्वनाथ दत्त जी के घर बेटा बनकर वह आया माता भुवनेश्वरी देवी थी नाम नरेन्द्र धराया परम...
अन्य रचनाएंबुद्धि और सुंदरता में हो गई एक दिन चर्चा दोनों में कौन अधिक अच्छा सुंदरता को था बड़ा अंहकार, सुंदर होने पर अपनी आकर्षित करने वाली अदाओं पर...
अन्य रचनाएंआज़ादी के लिए हमारी लंबी बड़ी लडाई थी लाखों लोगों ने प्राणों से कीमत बड़ी चुकाई थी व्यापारी बनकर आए और छल से हम पर राज किया हमक...
अन्य रचनाएंकुछ आखें जो कभी सोई नहीं बचपन की मासूमियत जिसे बोई नहीं हर कस्बे, हर कोने में रोते हुए वो अनाथ किलकारियों की जगह भीख मांगने लगे ...
अन्य रचनाएंतेरा शाम का सूरज बन ढल जाना, मेरा शबभर यूं भटकना सेहराओं में। फिर जिस्म तेरी छुअन से जल उठे ये ओस की बूंद तेरी निगाहों की मीठी-सी शरारत...
अन्य रचनाएंमुरली वाले घनश्याम, तुम मानो या ना मान-2 मुझे रास्ते में ना छेडो, कल सवेरे मिलना-2 वृदांवन की कुंज गलीन में फिरते रास रचाते-2 न...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022