सूरज, तुम क्यों जलते हो इतना? कहाँ से आती है तुम्हारी ज्वाला? क्यों इतनी तपन है तुममें? कैसे उठाए फिरते हो इतना ताप? मैं जब भी महसूसता हूँ ...
अन्य रचनाएंअब चिड़िया आती नहीं मुंडेर पर! फड़फड़ाते नहीं पंख, सुबह को समेटकर- अब गाती नहीं चिड़िया.... अब आती नहीं चिड़िया... कौवे भी, अतिथि का संदेश लेक...
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