टाइपराइटर हां टाइपराइटर टाइपराइटर ही तो बन गयीं हैं मां........... हम सब के लिए । मां की अनकही बातों को,...
अन्य रचनाएं“प्रिय रवि, सुना है,अभी तुम्हारा वहाँ मन नहीं लग रहा है। वापस घर आने का मन बना रहे हो, ऐसा कुविचार तुम्हारे मन में क्यूँ आया?...
अन्य रचनाएंज्ञान के दीप जलाये चल सृजन के गीत गाये चल ख़ून , पसीना बहाये चल बंजर जमीं लह लहाये चल कोशिशों के हल चलाये चल क़दम से कदम ...
अन्य रचनाएंचेहरा छुपाए बैठे हो यूँ, बालों में छुप गया हो चांद,जैसे बादलों में बीच भंवर में डूब रहा हूं मैं पड...
अन्य रचनाएंहर शय पे बुरी नज़र है मूरख तेरी जाग, बंदे तुझे हर पल जगाएगा कौन? कहां,चले गए आप हमसे यूं रूठकर नखरे हमको अब दिखाएगा ...
अन्य रचनाएंफिर भला अंधेरा, कब तलक टिक पाएगा, कल फिर दिन निकलेगा, सवेरा आएगा, फिर भला अंधेरा, कब तलक टिक पाएगा, कल फिर दिन निकलेगा, सवे...
अन्य रचनाएंइकलौता तारा हूं मां मैं तेरी इन बूढ़ी आखों का तेरे जीवन में चांद बनके चमक जाऊंगा मैं छोड़ दिया है मैंने बचपन गांव की उन गल...
अन्य रचनाएंनज़रों में सबकी.. चुभने, लगा हूं मैं । जबसे कड़वा सच. बोलने, लगा हूं मैं ।। तेरी आंखों में......चुभने, लगा हूं मैं ...
अन्य रचनाएंऋषी मुनि का धर कर वेश अपना अवध छोड़कर देश प्रिय तुम वन में चले गये.... क्या मेरा नहीं था संज्ञान या हृदय हो गया था पाषाण ...
अन्य रचनाएंशायद ! कहने भर को रह गयी हूँ , माता ? मैं, गौ माता ! जिस मां की कोख से जन्मा बेटा उसकी पीर नहीं समझ पाता, उसके दुःख दर्द, द...
अन्य रचनाएं(अस्वीकरण) (इस कहानी के सभी पात्र और उनके नाम और घटनाएं काल्पनिक हैं और इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति या घटना से कोई भी संबं...
अन्य रचनाएंमैं भी इक जीव हूं, नारी हूं फ़िर क्यूं मैं सबको, भारी हूं बेटी होना, मेरा, पाप है ? या नारी जीवन अभिशाप है हो,कर्त्तव्यविमुख...
अन्य रचनाएंतेरी यादों के खंजर दिल में उतरते हैं चाहत की गली से जब हम गुजरते हैं टूट के चाहा तुझको ,तेरी,चाहतों में टूटे तेर...
अन्य रचनाएंहम बच्चों के जीने की आस है माँ . इंसानी हर रिश्तों में ख़ास है माँ . आज फिर याद आये हैं.... .. बाबूजी . फिर...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022