वृक्ष हों भले खड़े, हों घने हों बड़े, एक पत्र छाँह भी, माँग मत, माँग मत, माँग मत, अग्निपथ अग्निपथ अग...
अन्य रचनाएंआंखों की चंचलता के पीछे गम के आँसू जो देख लेता है, होठों की मुस्कुराहट में दबी कुंठा जो भाँप लेता है। चेहरे की रौनक भी छुपा सकती नहीं वेदना,...
अन्य रचनाएंस्त्री हूँ मैं हाँ एक स्त्री हूँ मैं ! नहीं हूँ मैं किसी कवि की कविता न ही किसी शायर की शायरी हूँ बस एक ओजस्वी शब्द हूँ मैं स्त्री हूँ मैं ह...
अन्य रचनाएंहवा की सरसराहट कानों में रस घोलती है, मानो प्रकृति हौले से हमसे कुछ कहती है। जैसे कह रही हो, कर विश्वास मेरा.. अमृत कलश से भरी,वात्सल्य से भ...
अन्य रचनाएंसपने देखना हमारे बस में नहीं होता।चाहें या न चाहें ,आँखो में आ ही जाता है।फिर ये तो मेरा ऐसा सपना था जो अनायास ही मेरी आँखों में आ बसा था।कब...
अन्य रचनाएंइसे कहानी न समझिएगा ।सच है ये मेरे जीवन का बहुत ही मीठा ,मधुर ,सुंदर और जितनी अलंकारों से अलंकृत कर सकूँ वैसा सच । मेरे मायके में बच्चों की ...
अन्य रचनाएंआज ऋचा बहुत खुश थी। रात जैसे आँखों में ही बीत गई और क्यो न हो, सालों बाद वह अपने मायके जा रही थी। उसे तनिक भी इच्छा नहीं थी कि उसकी शादी विद...
अन्य रचनाएंबात उन दिनों की है जब मैं स्कूल में पढ़ा करती थी ।शायद दसवीं या ग्यारहवीं क्लास में थी ।स्कूल आते -जाते बस दो ही चीजों को देखने का शौक था।एक ...
अन्य रचनाएंबेटा सागर, बहु निशा और उनके दोनों बच्चे लगभग सोलह सालों से लंदन में रह रहे हैं। बच्चों का तो जन्म ही वहीं का है। इसबार बेटे ने ह...
अन्य रचनाएंघर ,शहर बदलना रेवती की मजबूरी थी । कारण उसके पापा का तबादला हर तीसरे वर्ष हो जाया करता था और रेवती अपने माँ- पापा के साथ पैकिंग में जुट जाया...
अन्य रचनाएंवो दो बारहसिंघा पानी पीने नदी को जाते देख परछाई पानी मे अपनी अपने सुंदर सिंघों पर रीझे ईश्वर ने कितनी सुंदर सिंघे दी सोच सोच इतर...
अन्य रचनाएंतेज़ बारिश के बाद आसमान निखर गया था । ढलते सूर्य की किरणें जैसे पूरे आसमान को लाल नारंगी किए दे रही है । धरा को लगा की इस निखरी सी उजास के बी...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022