****************** खिलखिलाने को जो मिला बचपन वह जिम्मेदारी उठाने में कुम्हला गया वो मुस्कुराता बचपन यूंही सिसकता रह गया किसी...
अन्य रचनाएं************** श्रद्ध तरंग की सुगंध बिखरते, वसंत से मनोरम अहसास हो तुम। बसते हो कहीं,बहते हो कहीं, जीवन की प्रेम भरी पुकार हो त...
अन्य रचनाएंश्रद्ध तरंग की सुगंध बिखरते, वसंत से मनोरम अहसास हो तुम। बसते हो कहीं,बहते हो कहीं, जीवन की प्रेम भरी पुकार में, हर क्षण हरपल साथ तुम्हारा ...
अन्य रचनाएं१.प्रीत पलाश केसरी तन रंगे फाग धुलंडी २.प्रेम गुलाल रंगे लाल मलाल बेरंगी होली ३. डफ की थाप फाग गाए गोरियां रंग फुहार ४. बसंती फाग ...
अन्य रचनाएंमैं आस्था हूं , अगर तुम विश्वास हो। मैं प्रेम हूं, अगर तुम सम्मान हो। मैं मैत्री हूं। अगर तुम पारदर्श हो । मैं ममता हूं। अगर तुम वत्सल हो। म...
अन्य रचनाएं............................................................. समाज !तू कब और कहाँ बना सहायक और कब बना सारथी सत्य का मैंने कदम-कद...
अन्य रचनाएं*वो नीड़ बना बसे भक्ति व प्रीति हिय की डाली * देह से रुह समर्पित सर्वस्व प्रेम पपीहे * प्रेम का मेह बतरस बरसे भीगते पंछी ...
अन्य रचनाएं१. अनुग्रहित कृत कृत है तेरी पुत्री तुम्हारी २. बागबान से शीत ताप सह के पाला श्रम से ३.ओ जन्मदाता प्रेम की पर...
अन्य रचनाएंचेहरे-मोहरे से बहुत कुछ मेरे जैसी, एक की आवाज एक की शक्ल मेरे जैसी परवाह बड़ी उनकी प्रीत बड़ी, वो रखती अंदाज थोड़े अलग सी, कुछ ...
अन्य रचनाएंतुम गुरुता.... अनुग्रह की गंगोत्री से उतरी मौन अनुभूति हो और क्षुब्ध ह्रदयस्थल में समाती समानुभूति हो तुम करुणा बन.... दग्ध तिर...
अन्य रचनाएंसमय की अभिधा मैं किसे दूं ? बचपन की अठखेलियों में आंख मिचौनी खेलता समय, या प्रेम-समन्दर में नैया खेता, इक क्षण में ओझल हो जाता...
अन्य रचनाएं†*******************† कैसे कहूं... तुम कविता नहीं, आराधना हो मेरी, कविता बन उतरी, वो कृपा प्रसाद है तेरी, जो मुझमें बहकर निकली, ...
अन्य रचनाएं१.परम स्नेही तुम आ जाओ द्वारे बैचेन मन २.बांवला मन तुम्हें बौरा के ढूंढे कहां हो तुम...? ३.राहों में बिछे ये दो नैन हम...
अन्य रचनाएं१.याद आते हैं वो चेहरे-मोहरे मेरे गांव के २.कहां दिखावा सूरते भोली-भाली सीधी-सादी सी ३.खेल तमाम तन मिट्टी से सन...
अन्य रचनाएंसमाज तू बता कब और कहां सहायक बना.. ? बता तो सही कब सत्य का सारथी बना..? मैंने टूटते देखा बेबस पिता को, तेरे आगे नतमस्तक हो, अक...
अन्य रचनाएं१. अनुग्रहित कृत कृत है तेरी पुत्री तुम्हारी २. बागबान से शीत ताप सह के पाला श्रम से ३.ओ जन्मदाता प्रेम की पराकाष्ठा व...
अन्य रचनाएं१. हे मातृभूमि नमो सदा वत्सला पुण्य सलिला २. विश्व साम्राज्ञी धर्म दिग्विजयिनी राष्ट्र कल्याणी ३. हिमगिरि से ह...
अन्य रचनाएंस्त्री- पुरुष के दायरे, समाज में इनके मायने, कौन तय करता है ? परिवार,जाति,समाज, धर्म या किताबी ज्ञान, ये जिम्मेदारी और कामकाज का विभेद, य...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022