बदलते रिश्तों की आज बदल गई बिसात धीरे धीरे खुद हमने ही कर लिया बर्बाद मात पिता को भाते नही अब बच्चे हम दो हमारे दो से जो हो गए अब हम...
अन्य रचनाएंबदलते रिश्तों की आज बदल गई बिसात धीरे धीरे खुद हमने ही कर लिया बर्बाद मात पिता को भाते नही अब बच्चे हम दो हमारे दो से जो हो गए अ...
अन्य रचनाएंसांझ ढले ही हो जाती है चहल पहल आज भी उस घर में आती है सहर खुशबू मीठी नोक झोंक की आवाज़ बच्चो के लिए हो जाती हैं आज भी मोज हो गए लाख...
अन्य रचनाएंसांझ ढले ही हो जाती है चहल पहल आज भी उस घर में आती है सहर खुशबू मीठी नोक झोंक की आवाज़ बच्चो के लिए हो जाती हैं आज भी मोज हो गए...
अन्य रचनाएंकभी कभी नहीं करो तुम रोज़ काम का बहुत है भईया योग तरोताजा महसूस होगा तुमको हर पल आज को ठीक करो बेहतर होगा कल मनुष्य के शरीर में ह...
अन्य रचनाएंकभी कभी नहीं करो तुम रोज़ काम का बहुत है भईया योग तरोताजा महसूस होगा तुमको हर पल आज को ठीक करो बेहतर होगा कल मनुष्य के शरीर म...
अन्य रचनाएंभेड़ चाल में माना होती राह आसान भीड़ से अलग जो चलते ,दिखाते कमाल न ख़ुद का रास्ता न मंजिल की ख़बर पत्थर तोड़ निकलते ,वही पहुंचे शिखर...
अन्य रचनाएंभेड़ चाल में माना होती राह आसान भीड़ से अलग जो चलते ,दिखाते कमाल न ख़ुद का रास्ता न मंजिल की ख़बर पत्थर तोड़ निकलते ,वही पहुंचे ...
अन्य रचनाएंरीया आज पहली बार अकेले सफ़र कर रही थी ,उसे बी इड के पेपर देने दिल्ली अपनी बुआ के घर जो जाना था गाड़ी के चलते चलते ही वो पहुंची थी। ...
अन्य रचनाएंरीया आज पहली बार अकेले सफ़र कर रही थी ,उसे बी इड के पेपर देने दिल्ली अपनी बुआ के घर जो जाना था गाड़ी के चलते चलते ही वो पहुंची ...
अन्य रचनाएंएक कली मासूम सी दुनियां के रंग से अंजान सी रखा पहला कदम यौवन में अपने ही आप में मग्न सी, दूर देश से आया कोई भंवरा हो गया देख उस क...
अन्य रचनाएंएक कली मासूम सी दुनियां के रंग से अंजान सी रखा पहला कदम यौवन में अपने ही आप में मग्न सी, दूर देश से आया कोई भंवरा हो गया देख ...
अन्य रचनाएंपेड़ पौधे लेते रहे आकर जमीन का यही है विस्तार काट काट कर पेड़ पौधे ऊंची ऊंची रिहायशी इमारतें बना ली एक के ऊपर एक न छोड़ा बाग...
अन्य रचनाएंआज नई बहू घर मेरे आई सास ने ले ली बड़ के बलाई सास यू बोली सुन ले रानी घर मेरा है बेटा मेरा रहे ध्यान ये तेरा । सासु जी सब बातें समझ मैं गई...
अन्य रचनाएंतेरे जाने के बाद किसी को न अपना बनाया जो तू नही रहा पास मेरे किसी को न इस दिल में बसाया । हवाओं में भी कोई न छाया किसी का न प...
अन्य रचनाएंअपना शहर छोड़ कर तेरे साथ चलें है ए ज़िंदगी अब फाके मिले राहों में या तू दे दावतें ए ज़िंदगी वो बस्ता , वो पेन ,वो का...
अन्य रचनाएंअपने बुजुर्गो का जो करता सम्मान जग में उसका होता बंधु बड़ा नाम नींव का एक एक पत्थर जिसने लगाया अपने प्रेम से परिश्रम से घर को ...
अन्य रचनाएंमेरी प्यारी मां ,,, सपनों सी न्यारी मां हो पास तू अगर कुछ नहीं फ़िर चिंता है तेरे आंचल के तले सब कुछ मुझे मिला है किया बहुत ...
अन्य रचनाएंमजदूर हूं मजबूर नही करता हूं मेहनत जी हजूरी नही ,,,, अपने हाथो पे बस भरोसा किस्मत तो मेरी रंगीन नहीं ,,,, लाखों के मैं महल बना...
अन्य रचनाएंआज कल का जमाना यही है भाई सबसे पहले पूजो तुम लुगाई घर के सारे काम करो देवी जी को खुश रखो वो हुई नाराज तो समझ लेना अच्छी खासी...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022