चला इस समाज ने हमेशा दोहरा ही दाँव, बदलकर रख दिया सम्पूर्ण मानव स्वभाव, जब जबाब माँगा किसी ने तो मुस्कुराकर कर दिया भेदभाव.....। असमानता ऐस...
अन्य रचनाएंचल वहाँ जाते हैं, मन जिधर हो,उधर कुछ वक्त बिताते हैं, भूलते हैं कुछ पल जहाँ को सुकूँ की तलाश में कहीं घूम आते हैं....। चल वहाँ ...
अन्य रचनाएंतूफान जो उठा तिश्नगी का जिन्दगी के मायने बदल गये, चिन्ता जो हुयी भविष्य की जीने के तरीके बदल गये, आँखें जो दूरदर्शी हुयी हमसफर ह...
अन्य रचनाएंअकेलापन वही है, जब कोई नजर ना आये, अकेलापन वही है, जब हर नजारा सूना हो जाये, है अकेलापन वो भी जब बहुत दूर साथ चलने के बाद अकेले ...
अन्य रचनाएंहोती जो हर किसी के पास अपनी किस्मत की किताब, बदल लेते हालातों को अपने सब सोचिये फिर क्या होता जनाब...? मेहनत जैसा कोई शब्द न होत...
अन्य रचनाएंचल रहे झंझावात में सारे, अपनी कश्तियाँ,अपने किनारे, तूफानों में पुरजोर सम्हाले हैं उस पार न जाने क्या हों नजारे....? उठती लहरों ...
अन्य रचनाएंहै बावरी सी वो, थोड़ी सी साँवरी सी वो, मेरे लिये तो वो कहानी है मगर है खुद शायरी सी वो, है खुद में ही खुश बहुत हंसी की है छाँव स...
अन्य रचनाएंअक्सर भाईयों के बारे में बहनें लिखती हैं और बेहतरीन लिखती है। अपने भाईयों के प्यार,त्याग, सुरक्षा के बारे में बहुत कुछ ल...
अन्य रचनाएंजो भा जाये वही संगीत मन का, जो दिल गुनगुनाये वही गीत तरन्नुम का, जो आत्मिक शांति दे जाये वही योग जहाँ का, जो आगे बढ़ने से रोके व...
अन्य रचनाएंखुद सोचो की जीवन से क्या चाहिये, सुकूँ का आज या चमकता कल चाहिये, फैसला ये उतना भी मुश्किल नहीं है बस मुट्ठी भर आशा का प्रकाश चाह...
अन्य रचनाएंन चाह कुछ कर गुजरने की, न आस कुछ अब बदलने की, झाँकना है बस औरों की गलतियों पर ये खिड़कियों का शहर है बाबू यहाँ जरूरत नहीं हर बात...
अन्य रचनाएंकभी किसी रोज जगे, और बस चल दें, हाथों में तेरा हाथ हो प्रियवर और दोनों कहीं दूर चले...। रास्तेभर हो फिर बातें हमारी हौले से फिर ...
अन्य रचनाएंहोती थी जिनमें सपनों की दुनिया, मिलती थी उनसे असीम खुशियाँ, जाने कहाँ ओझल हो गयी वो बुजुर्गों की नैतिक शिक्षा की कहानियाँ...। कभ...
अन्य रचनाएंकभी दिखाता आशा नयी भोर सी, कभी शान्ती जग में हुये शोर की, नजरिया आपका है ये तो जनाब ललिमा फैलाता अम्बर,चहुँ ओर ही....। रंगीन वो ...
अन्य रचनाएंभोले का अमृत जिसने पिया, संसार को कभी भाव न दिया, रत रहा हरदम महाकाल में मन मेरा फिर हुआ रंगरसिया .....। शरण उसकी अपना लेते जो, ...
अन्य रचनाएंखोजने होते हैं बस वो चार लोग, चुनने होते हैं बस वो चार लोग, साथ आपके जो बिन लोभ हो सम्हालने होते हैं बस वो चार लोग...। क्या करोग...
अन्य रचनाएंसफर सुहाना अच्छा लगता है, डूबता सूरज आकर्षित करता है, दार्शनिक बना देता है ये अक्सर ललिमा में जब अतीत दिखता है...। सफर हर तरफ, ह...
अन्य रचनाएंसच अब है ही कौन यहाँ? बनावटीपन भरा रगो में बेतहाशा, फीकी हंसी की इस दुनिया में झूठा है आईना, तो क्या हुआ....? रंग बदलते लोग हर त...
अन्य रचनाएंबहुत संघर्षी,फिर भी जीवन है प्यारा, बेहतर से बेहतरीन हमेशा लक्ष्य हमारा, लगे रहते पाने को दिखावा निरन्तर कौन बूझे असली-नकली जग ...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022