वो जो नाम जोड़ता था साथ हमारे, हमारा नाम ज़हन से मिटाने लगा, हम जब से बढ़ने लगे उसकी जानिब, कदम अपने वो पीछे हटाने लगा! हम बढ...
अन्य रचनाएंपर्यावरण का अर्थ है प्रकृति का आवरण- यानि, प्रकृति का हरा-भरा रूप, जहाँ प्रकृति के हर जीव को बराबर का महत्व रखता है-चाहे वह पेड़-पौधे हों, य...
अन्य रचनाएंगीली मिट्टी सा मन था मेरा तुम्हारे इंतज़ार मे रहा, कि एक बार- कभी तुम आ जाते- मुझे छू कर ढूंढ लेते मुझमें कई संभावनाएं; कर ल...
अन्य रचनाएंचैत्र नवरात्रि तिथि नवमी और काल मध्याह्न धन्य हुई गोदी कौशल्या की, सूर्यवंशी राजा दशरथ के घर जब जन्मे राम पवित्र हुई भारत भूम...
अन्य रचनाएंउतरीं हैं आंधियां आंगन में इक इरादे से , उतारू कि हर दीप आज बुझाया जाए, कर के अंधेरा, फिर, बल अपना बतलाया जाए! वो जो ह॔सते हैं...
अन्य रचनाएंहाँ- नारी हूँ मैं!! मीनाक्षी हूँ, मेनका, या कहो रंभा हूँ- हाँ सौंदर्या हूँ मैं- लज्जा हूँ मैं! मैं दिति-अदिति,सौभाग्या हूँ मै...
अन्य रचनाएंतुम्हारी खुशियों के उजाले मेरे लिए न भी सही... मैं रात अंधेरी में भी तुम्हारे लिए मैं जलती रहूँगी! जब कोई न होगा साथ तुम्हारे....
अन्य रचनाएंतुम मेरे आराध्य हो शिव, तुम मेरे भगवान करती हूँ विश्वास मैं, मन से करती हूँ आराधना! सच है कि दुनिया को तुम नजर नहीं आते हो म...
अन्य रचनाएंहाँ! है गर्व तुम्हें हो पुरुष तुम, नर हो- सृष्टि के रक्षक हो- मेरे गर्भ से उत्पन्न हुए हो- नारी हूँ मैं!! एक हूँ मैं और अनेक भी...
अन्य रचनाएंकभी कभी वक्त यूँ निकल जाता है- हम पकड़ नहीं पाते हैं- गम में भी मुस्कुराना आता किसी को, कहीं खुशी में भी आंसू बहते हैं! दुनिया के अजब नज़ार...
अन्य रचनाएंश्यामा के जीवन का एक ही सपना था- स्वर्ग सा जीवन! जिसकी परिभाषा थी कि वह खूब अमीर हो, अनंत पैसा हो जो किसी भी चीज़ को खरीदने में सक्षम हो; सा...
अन्य रचनाएंदर्द में भी होंठ मुस्कुरा देते हैं, ज़हन में छा जाता है जब मीठी सी तेरी यादों का मौसम; वो यादें नदी किनारे के झूलों की वो यादे...
अन्य रचनाएंतिल भर भी चरण शरण से दूरी ना हो, तिल भर भी प्रभु की विस्मृति ना हो, तिल भर भी नाम सेवा ना छूटे, तिल भर भी श्री जी की रूप नेत्...
अन्य रचनाएंहो बुद्धि विकसित-विचारशील, हो मन सदा जो संयम में भुजा में जोश भरा हो ऐसा, चाहे तो पर्वत चटका दे! नदियों का मुख भी जो मोड़ सके,...
अन्य रचनाएंछोटे से गाँव की वासी थी, सोच में मगर बड़ी ऊंचाई थी। छोटी सी दुनिया बसानी थी संग जिसके उसी पति द्वारा वो ठुकराई थी! देखी थी भूख...
अन्य रचनाएंकेतली में उफनता पानी साक्षी बनता है मेरे मन की व्याकुलता का कूटती हूँ अदरक, मानो, मन ही मार रही हूँ! कूटे से अदरक की खुशबू , फ...
अन्य रचनाएंपर्यावरण का अर्थ है प्रकृति का आवरण- यानि, प्रकृति का हरा-भरा रूप, जहाँ प्रकृति के हर जीव को बराबर का महत्व रखता है-चाहे वह पेड़...
अन्य रचनाएंजी लिए जाते हैं कुछ पल, और, गुज़र कर भी वो यादों में ज़िंदा रह जाते हैं ज़िदगी थम जाती है उन लम्हों में, और पल कभी अंतःकरण में...
अन्य रचनाएंसूख कर गिरते हैं पेंडों से, पत्ते जब कदमों में बिखर जाते हैं समझो, पतझड़ का मौसम आता है, नई कोंपल खिलती हैं, फूल हवा महकाते है...
अन्य रचनाएंमैं बचपन हूँ- हंसता हंसाता खिलखिलाता सा माता की आंखों का तारा हूँ पिता का मुख पर तेज हूँ जगमगाता सा! मैं बचपन हूँ बेफिक्र सी द...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022