दिन की तपिश के बाद मैं रात्रि की शीतलता में खिलती हूं मैं एकांत में जब तुमसे मिलती हूं व्यस्तता के बहाव से निकल कर कुछ क्षण मैं ...
अन्य रचनाएंवो खिड़की जो बंद रहती है रोशनी के लिए सिसकती है कुछ छेदों से झांकती रोशनी अंधकार को मिटाती है वो बंद कुड़ियां जंग लगी हुई बेजा...
अन्य रचनाएंलो थाम लो अंगुलियों से तुम डोर चल ले चलूं तुम्हें मां सरस्वती की ओर चकाचौंध करेंगी तुम्हें उजाले मेरी आंचल तले शितलता है घनघोर ...
अन्य रचनाएंकोरी पड़ी कागज लिखो बहता पानी जन्म दिवस सबके घर मृत्यु रचे अटल कहानी पग पग रखें संघर्ष धाराएं सबको है रीत इसकी निभानी सिया राम स...
अन्य रचनाएंमांग सिंदूरी जुल्फों की है बद्री छाई चमक रही है बिंदिया वैसे लालिमा लिए खुबसूरती आई नाक नथनी पिया को भाए झूमका कानों में है संगी...
अन्य रचनाएंभम्रित थे या भम्रित हो गये वो तस्वीरों में थे या हम यूं ही उनमें खो गये रात गुजरी और भोर हो गये वो खामोश ही रहे और हम तो उनमें ख...
अन्य रचनाएंसुनो प्रिये ❤️ मैं नहीं निहारती हूं दर्पण मैं खुद को तुम्हारे आंखों में संवार लेती हूं तुम्हें देख तुम्हारे प्रेम का श्रृंगार सज...
अन्य रचनाएंमेरी झुकी पलकें गतिमान होना चाहती है सिर्फ तुम तक, और वहां कुछ पल ठहराव चाहती है पर तुम्हें बिना बताए एक आड़ लिए तुम्हें जी भर ...
अन्य रचनाएंइतनी नाराजगी क्यों ? बोलो मुझसे कोई गलती हुई है क्या? नहीं! कुछ नहीं ,पता नहीं फोन रखो! अच्छा ठीक है माफ कर दीजिए ना अब नहीं ...
अन्य रचनाएंआप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं🙏🙏 अंश्रुधारा है आंखों में कैसे दर्शन पाऊं मां, उतना ज्ञान नहीं है मुझमें जो तेरी महि...
अन्य रचनाएंइंतज़ार होती थी हसीन जब एक आहट तुम्हारी होती थी खिलखिला उठती थी वादियां जब घूंघरु दौड़ बालकोनी पर आ रुकती थी इन प्यासी निगाहों क...
अन्य रचनाएंप्रेम में नकाब नहीं होती वो तो बेहिसाब होती है लफ्ज़ ठहर भी गए फिर भी हृदय से संवाद होती है चूंकि प्रेम तो बेहिसाब होती हैं प्रत...
अन्य रचनाएंतुम मिले तो एक वजह मिली जीवन तो थी पर अनुभूति तो तुमने सौगात में दी जीवन तो तब भी था और अब भी है फिर झूठ क्यों कहूं पर तुम्हारे ...
अन्य रचनाएंप्रेम को परखा नहीं प्रेम को तो समझा जाता है ये वो साथ भी हो सकता है जहां हम सिर्फ सारे गम भुला कर दो पल साथ तुम्हारे हंस सके प्...
अन्य रचनाएंनारंगी सी चुन्नर ओढ़े देखों किरणें आई है, मधुर मधुर गुंजन लिए खग ने सहनाई बजाई है बिछ गई है हरी कालिन उस पर ओश लगे मानों मोती क...
अन्य रचनाएंकैद कर लेते खुबसूरती को काश तो कर देते हम अमावस्य में झिलमिलाती रोशनी की बरसात काश ये निगाहें तुम तक पहुंच पाती तो हम कर पाते जी...
अन्य रचनाएंसो चुका है जग सारा मेरी अंखियां तुम्हारे अंखियन मैं समाई है आंसू झलक रहे हैं क्यों तो चैन मुझे भी ना आई है बरस रही है यहां घनघोर...
अन्य रचनाएंमत पूछो कोई मेरी परिभाषा जो लिखा बस हृदय से लिखा दिमाग की नहीं है इसमें भाषा, हृदय है शब्दों की झंकार और लेखनी देती है मेरे अथाह...
अन्य रचनाएंझमाझम बारिश की बूंदों में मैं प्यार का पैगाम लिखूं तपती रेत में हो तुम शीतलता भरी संदेश एक, तुम्हारे नाम लिखूं गर्म नैनों के भंव...
अन्य रचनाएंशुकून पाऊं मैं प्यास में जब साथी भर अंजुली नीर से प्यास बुझाए, तृप्त हो जाए आत्मा जब प्रिये जल संग प्रेम पिलाए, थम जाएं वो क्षण ...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022