गरिमा राकेश गौतम लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैंसभी दिखाएं
सागर सा बना देता हैं।
सागर सा बना देता हैं।
 ये जीवन
 ये जीवन
 उबटन की तरह उतार दिया
 उबटन की तरह उतार दिया
कुछ यूँही....
कुछ यूँही....
पापा
पापा
मेरी कविताएं पढ़कर
मेरी कविताएं पढ़कर
चहुँओर उसका बसेरा
चहुँओर उसका बसेरा
कल कान्हा ने राधा से कहा
 लगता है मैं बड़ी हो गई।
 बस एक......
 पा लूँ
ये दवाइयां भी ना बडे़ नखरें दिखाती हैं।
क्या वर्तमान में शिक्षा व स्वास्थ्य का व्यवसायीकरण हुआ है ?
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