अथाह वारि का स्वामित्व पाकर भी, हे वारिधि तू तनिक नही अकड़ता हैं। दूर से आती सरिताओं को सहर्ष शरण में लेता हैं। सुदामा सी चलकर आती हैं वो तेर...
अन्य रचनाएंअथाह वारि का स्वामित्व पाकर भी, हे वारिधि तू तनिक नही अकड़ता हैं। दूर से आती सरिताओं को सहर्ष शरण में लेता हैं। सुदामा सी चलकर आती हैं वो तेर...
अन्य रचनाएंये जीवन कभी -कभी दो बिंदुओं के बीच में झूल जाता हैं। उत्तरित, अनुउत्तरित के बीच में रह जाता हैं। इच्छा, अनिच्छा की भेंट चढ़ जाता हैं। ये जीवन...
अन्य रचनाएंये जीवन कभी -कभी दो बिंदुओं के बीच में झूल जाता हैं। उत्तरित, अनुउत्तरित के बीच में रह जाता हैं। इच्छा, अनिच्छा की भेंट चढ़ जाता हैं। ये जीवन...
अन्य रचनाएंपीड़ाओं के मैल को मैंने उबटन की तरह उतार दिया। दुश्चिंताओं के घेरे को कपूर की तरह उड़ा दिया। विश्वास की बाती रख मैंने उम्मीदों का दीया जला लिय...
अन्य रचनाएंपीड़ाओं के मैल को मैंने उबटन की तरह उतार दिया। दुश्चिंताओं के घेरे को कपूर की तरह उड़ा दिया। विश्वास की बाती रख मैंने उम्मीदों का दीया जला लिय...
अन्य रचनाएंकुछ यूँही बेवजह तुमसे बात करना चाहती हूँ। यूँही बस बेवजह तुम्हें देर तक देखना चाहती हूँ। सुनना ज्यादा, और कहना कम चाहती हूँ। कुछ तुम्हारें छ...
अन्य रचनाएंकुछ यूँही बेवजह तुमसे बात करना चाहती हूँ। यूँही बस बेवजह तुम्हें देर तक देखना चाहती हूँ। सुनना ज्यादा, और कहना कम चाहती हूँ। कुछ तुम्हारें छ...
अन्य रचनाएंजेठ के ताप में आप शरद सा आभास हो। संघर्षों के काँटो में गुलाब के पुष्प हो। अजनबियों की भीड़ में हृदय के तार हो। जेठ के...... जीवन के ...
अन्य रचनाएंजेठ के ताप में आप शरद सा आभास हो। संघर्षों के काँटो में गुलाब के पुष्प हो। अजनबियों की भीड़ में हृदय के तार हो। जेठ के...... जीवन...
अन्य रचनाएंमेरी कविताएं पढ़कर कुछ लोग पूछते हैं। कौन है जिसे याद कर यूँ शब्दों को गढ़ती हो। जलती हो किसकी याद में नयन भिगोने वाले विरह गीत रचती हो। कोई त...
अन्य रचनाएंमेरी कविताएं पढ़कर कुछ लोग पूछते हैं। कौन है जिसे याद कर यूँ शब्दों को गढ़ती हो। जलती हो किसकी याद में नयन भिगोने वाले विरह गीत रचती हो। कोई त...
अन्य रचनाएंकभी खुशियों के दिन. कभी गमों की रात। कभी चाँद की चाँदनी कभी अमावस की रात। कभी धूप की तपिश कभी सावन की बरसात कभी काँटो से भरा दिन कभी गुलाबों...
अन्य रचनाएंकभी खुशियों के दिन. कभी गमों की रात। कभी चाँद की चाँदनी कभी अमावस की रात। कभी धूप की तपिश कभी सावन की बरसात कभी काँटो से भरा दिन कभी गुलाबों...
अन्य रचनाएंकल कान्हा ने राधा से कहा मैं तन्हाई में तुझे खोजता हूँ होता हूँ अकेला तुझे याद करता हूँ। काम नहीं होने पर तुझसे ही बात करता हूँ। देख मैं तुझ...
अन्य रचनाएंआलू भिंडी की सब्जी संग, दो पराठें ही खाने वाली मैं, लौकी की सब्जी के साथ ठंडी रोटी भी खाने लगी। लगता है मैं बड़ी हो गई। अपनी जिद को करवाने के...
अन्य रचनाएंमैं बह जाऊँगी सदियों तक, तुम्हारें लिए गंगा की तरह तुम बस एक बार भागीरथ की तरह लेने तो आओं। बिना सवाल चल दूँगी मैं पीछे पीछे तुम्हारें, तुम...
अन्य रचनाएंबड़ी फुरसत लिए तेरी फुरसत के इंतजार में हूँ कान्हा। थोड़ी फुरसत से एक नजर डालना कान्हा मेरी एक उम्र की प्रतीक्षा हैं कान्हा। तू मशरूफ़ है अपन...
अन्य रचनाएंइन दवाइयों के भी बड़े गजब नखरे होते हैं। जितनी रंग बिरंगी होती हैं उतने ही ठाठ होते हैं। खाली पेट चाहिए किसी को, किसी को भरा किसी...
अन्य रचनाएंसंसार में हमें लाने वाले हमारे जनक होते हैं जो हमें दुनिया दिखाते हैं ।लेकिन इस मृत्युलोक में जीवन मिलने के बाद हम आगे बढ़ते हैं। तब शिक्षक ...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022