आँखें भरमाई सी,नींदे अलसाईं सी! जाग उठती है हर छुट्टी की सुबह!! अरमान कसमसाये से, जहन में कुम्हलाये रे! पालें मंजिल जो मिल जाए...
अन्य रचनाएंअलसाई सी इक सुबह में.. खो गयीं थी मैं नींद के आगोश में.. तन मेरा था सोया.. मन रहा था जाग.. भीतर मचा था एक द्वन्द... रंगों का एक ...
अन्य रचनाएंबाहर तपती धूप है... शीतल बयार मिलती है तो बस... मेरे सपनों के घर में ... बाहर दो आंसू भी विचलित कर देते है.... सागर की लहरें भी ...
अन्य रचनाएंपिता ने सिखाया ऊँगली पकड़कर चलना.. पिता से ही सीखा जीवन के सांचे मे ढलना... पिता से ही सीखा जीवन क़ी सच्चाई से गुजरना. पहले तो लगत...
अन्य रचनाएंकैसे बयाँ करूँ मैं 'जख्म' ए दिल की बेचैनी???? सीने में आग ओ' आँखों में आपकी याद का पानी। बोझिल हूँ भीतर तक परन्तु, अ...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022