गर बिछड गया जो,कल को मै तुमसे.... तुम आंसू बहाओगे पर वो देख कहां मै पाउँगा! गर करते हो प्यार जो इतना तो जताते क्यों नही आज!! फूल चढ़ाओगे मेरी...
अन्य रचनाएंवो चाँद सा मुखड़ा उसका होंठ गुलाब की पंखुड़ियों से लगे बहते हुए झरने हों कोई जो खिलखिला कर वो हँस दे! वो सुराही सी गर्दन उसकी कजरारे से वो न...
अन्य रचनाएंहस्ती को मुहब्बत में फ़ना कौन करेगा! जब हम ना रहेंगे तो वफ़ा कौन करेगा !! ये माना मेरी जान मेरी ये सलोनी सूरत खटकती है तुम्हारी आँखों में काँट...
अन्य रचनाएंभगवान के घर से कुछ गधे फरार हो गए! कुछ तो पकड़े गए कुछ दुनियादार हो गए !! बेईमानी की कमाई ऐसी फली - फूली कि कल तक जो खुद हमारे रहमो करम पर पल...
अन्य रचनाएंमै एक कवि बनना चाहता हूँ मै एक कवि बनना चाहता हूँ! टूटी फूटी दो चार लाइनों को जोड़कर विसर्ग, मात्राओं की परवाह किए बगैर कोई नई, आधुनिक पद्द्...
अन्य रचनाएंए मालिक बता ये तू क्यों चाहता है - तेरा कोई बंदा ना हरदम सुखी हों, कभी ना कभी वो जरूर दुख पाएं! घिसटते हुए फिर तेरे दर पे आए वो माथा यूं रग...
अन्य रचनाएंपुकारते है तुमको हम आ जाओ तुम जहाँ भी हो सहा ना जाए ये अकेलापन आ जाओ तुम जहाँ भी हो! ये शाम भी बड़ी सुहानी है ठंडी पवन यूं अगन लगाए मुझे म...
अन्य रचनाएंवो सुबह अधूरी लगती है वो चाय अधूरी लगती है उसकी जो ना ख़बर मिले अख़बार अधूरे लगते हैं! वो शाम अधूरी लगती है महफिल वीरानी लगती है समझें ना जो ज...
अन्य रचनाएंमै बेबस हूँ ये सब देखने के लिए रोते हुए रोज यूं मुस्कुराना तेरा गुजरते हर इक पल के एहसास से सूखे पत्तों सा यूं थरथराना तेरा! सूखे ठूठों को ज...
अन्य रचनाएंजो नही है मेरा अपना वो ही अपना सा क्यूँ लगे ! रहूं दिन भर यूं खोया सा जो खोया हो कुछ अपना ये भी तो समझ ना आए जो कभी पाया ना था खोया है वो ऐस...
अन्य रचनाएंचुनी है जो सज़ा ख़ुद ही वो भुगतनी तो होगी दवा हो चाहे कड़वी कितनी वो निगलनी तो होगी! हँसे है जो इतना हम कभी यूं दिल खोलकर रोने की भी जिम्मेदा...
अन्य रचनाएंमुश्किल है ये दौर मगर यूं घबराने से क्या होगा हम सब को मिलकर लड़ना है सिर्फ सरकारों से क्या होगा! वैक्सीनेशन, मास्क जरूरी और दो गज की दूरी भी...
अन्य रचनाएंजिंदगी का हर पहलू दिखाता हमें वक़्त है हों जो हम परेशा कभी तो बहलाता हमें वक़्त है! दो साथी गर बिछड़ जाएं जीवन के किसी मोड़ पर उन सच्चे प्रेमियो...
अन्य रचनाएंहर तरफ है मारामारी कहीं दवा कहीं ऑक्सीजन की पल पल साँसे टूट रही है अपनों की अपनों के आगे ! कितने टूटे कितने बेबस चाहकर भी कुछ कर ना पाएं देख...
अन्य रचनाएंमाना हैं हालात बुरे अब हर ओर मचा है कौलाहल पर जान बचाने को अपनों की हर हाल मे लड़ना ही होगा ! औरों का भी साथ निभाएं भूल के उनको बिछड गए ज...
अन्य रचनाएंज़माने के सांचे में अबतक ढ़ले नही हम चाहते हैं जैसा लोग वैसे बनें नही हम! इसीलिए नही है कुछ ज्यादा दोस्त हमारे लगता है दोस्ती के लिए बनें नह...
अन्य रचनाएंमै अपने आप को इस भीड़ में कुछ इस कदर खो देना चाहता हूं कि मै खुद भी अपने आप को ना पहचान सकूं! क्योंकि मुझे नफ़रत है इस झूठी शक्लो-सूरत से किसी...
अन्य रचनाएंउफ़ ये बेबसी.......मुझे जीने नही देती! देखता रहूं रोज डूबते हुए यूं अपनों को ये ग़वारा तो नही मुझको पर बढकर आगे थाम लूं हाथ मै उनका हालातों ...
अन्य रचनाएंकोई ऐसा भी मिल जाएगा,नही मालूम था! जो पाया था वो तो कब का खो चुके थे क्या खोया और क्यों खोया ये सोचकर उलझे हुए थे इस कदर एक अरसे से कोई यू...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022