जैसे रहते सीप में मोती माँ की दुनियां वैसी ही होती छिपाए रखती हैं वो अपने भीतर बच्चों को दुनियां भर से सुरक्षित उस गहराई में...
अन्य रचनाएंसुबह सुबह एक आवाज़ आई..🗣️ नहीं आएगी काम वाली बाई..🏩🧕 सुनकर मेरी आँखें चकरायी..👀 लो फिर से मैं अटक गया..🫣 ऑफिस जाना लटक गया😰...
अन्य रचनाएंजनवरी माह में दिल्ली की कड़कडाती बारिश की 👩👧 बाल कविता👩👧 बादल चाचा बादल चाचा क्यूं बरसे इतने गरज़ गरज़ कर क्यूं बरसे कड़ कड़ ब...
अन्य रचनाएंपर्यावरण और प्रदूषण, जैसे रावण और विभीषण, कटते वृक्ष घटता है जीवन, दुखी है देखकर सब यह मन, संकल्प लें या कर ले वृक्षारोपण तपती त...
अन्य रचनाएंचलते चलते जो रुके राह में ज़िंदगी थक अगर जाती है तो फिर से चलिये ज़नाब वरना हौंसलों की मौत हो जाती है।। निभा रहे हो ज़बरन, ऊबते हुय...
अन्य रचनाएंगर्व था भारत-भूमि को कि महावीर की माता हूँ।। राम-कृष्ण और नानक जैसे वीरो की यशगाथा हूँ॥ कंद-मूल खाने वालों से मांसाहारी डरते थे।...
अन्य रचनाएंविश्व पर्यावरण दिवस पर समर्पित एक कविता पर्यावरण और प्रदूषण, जैसे रावण और विभीषण, कटते वृक्ष घटता है जीवन, दुखी है देखकर सब यह म...
अन्य रचनाएंबदल रही है मां पहले लगाती थी बिंदी माथे पर आज कोमपैक्ट ,आईलाइनर मसकारा और लिपस्टिक की है भरमार, पर बदला नहीं है जो था हमेशा वैस...
अन्य रचनाएंबन्द नही हैं सफलता का ,मेहनत से खोलना होगा।। दरवाज़ा... ढीला नहीं अधिकारों का , हक़ से बोलना होगा।। दरवाज़ा... रुका है इंसानियत के ...
अन्य रचनाएंफ़ासलों में दरमियां चाहे भले हर बार हो तेरे प्यार की कैद या मेरी रुसवा तन्हाइयां चलूं पीछे पीछे जब भी हो तेरी परछाइयां राह मोड़ कर...
अन्य रचनाएंमाँ तू बड़ी नादान है बड़ी अनजान है आता ही नही ढंग तुझे यहाँ का..!! ये भी कोई आन है माँ तू बड़ी नादान है।। जाने क्यों कुछ नही समझती ...
अन्य रचनाएंजब आंखें खुलते ही दिखता हैं ममता को बालक का प्यारा स्पंदन, तो होता हैं बसंत।। 🍁 तुम ही मेरे आदि तुम्हारे बाद हर अंत तुम हँसे...
अन्य रचनाएंबादल चाचा बादल चाचा क्यूं बरसे इतने गरज़ गरज़ कर क्यूं बरसे कड़ कड़ बिजली बुआ बरसती क्या वो हम से कहने को कुछ है तरसती गड़ गड़ तुम क्य...
अन्य रचनाएंकभी कभी अपना साथ भी लगता है मुझे दिसम्बर ओर जनवरी का साथ.., तुम्हें रहता जल्द जाने हरपल इंतज़ार मैं रहती लौट आने को बेक़रार तुम ह...
अन्य रचनाएंजब आंखें खुलते ही दिखता हैं ममता को बालक का प्यारा स्पंदन, तो होता हैं बसंत।। 🍁 तुम ही मेरे आदि तुम्हारे बाद हर अंत तुम हँसे तो सावन रूठ...
अन्य रचनाएंवो बरामदे वो झरोखे ओर चौखट आज भी बुलाती हैं काकी की चौकी गलियारे में बैठी राम राम करती बूढ़ी दादी घर के आंगन में पसरा वो दाना ब...
अन्य रचनाएंलेकिन भला रुकी है जिंदगी ? नहीं,किसी की नहीं ,बस सब कुछ संभालने की जद्दोजहद जारी है जब मिलगये परिणाम बिन परीक्षा के तो अगली कक्षा में आने की...
अन्य रचनाएंआधी आबादी जो पूरी आबादी है ये जीवन है,जीने पर सबकी आज़ादी है जैसे भूख में है भोजन जरूरी प्यास तो पीने से हो पूरी धरा का आधार स्त्...
अन्य रचनाएंरश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022