गाँधी ने कहा था--- पाप से घृणा करो पापी से नहीं... पाप को तज दो पापी को नहीं... हमने उनका दर्शन मान लिया, पाप को तजा न तजा पापी को गले लगा ...
अन्य रचनाएंये खेल है खेल चाहे कोई हो खेल भावना से खेलिये खेल चाहे कोई हो स्वास्थ्य के लिये खेलिये मित्रों संग हिलमिल के खेलिये भाईचारे को खेल स्वास्थ्य...
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