जब गगन घिरा था आंधी से, तब बिजली बन तुम चमके थे । जब शत्रु शोले दहक रहे थे, तुम बादल से गरजे थे । बरसात करी थी प्रलयमयी, ओलों का उल्कापात कि...
अन्य रचनाएंजिम्मेदार कौन !! यह वह चुभता हुआ प्रश्न है मेरे आज के लेख का, जिसका जवाब हम आगे ढूंढने का प्रयत्न करेंगे । आधुनिक परिवेश में एकल परिवारों ...
अन्य रचनाएंपथ के राही तू पथ को मत भूल मिले जो शूल, मिले जो धूल, न कर परवाह, न कर तू भूल, पथ के राही तू पथ को मत भूल मिलेंगे कष्ट, हैं परम जो सत्य, लग...
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