तुम प्यार की मूरत हो हम सबकी जरूरत हो मां की इज्जत पिता की जान दो दो कुल की एक पहचान तूं आंगन की खुशहाली तुम शुभ मुहूरत हो तुम प्यार की.......
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अन्य रचनाएंजन-जन के मन दीप जलाती मानव मूल्यों की माला मन में करुणा भाव जगाती मानव मूल्यों की माला सदाचार के आभूषण से तन-मन खूब सजाना है अपन...
अन्य रचनाएंबड़ा खुशनुमा सहर था ट्रेन का सफर था मंजिल का इंतजार था दिल बेजार था अचानक आंख खुल गई मन में मिश्री सी घुल गई ...
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